अगर आप भी परांठे के शौकीन हैं तो यह खबर आपके लिए काम की है। कई लोगों में इस बात की कंफ्यूजन है कि रोटी और परांठे पर उनको कितना माल और सेवा कर (GST) देना होगा है। गुजरात की एडवांस रूलिंग अथॉरिटी (एएआर) ने लोगों की कंफ्यूजन को दूर किया है। गुजरात बेंच ने साफ किया है कि रोटी पर पांच फीसदी है जीएसटी लगता है। वहीं रेडी टु कुक परांठे पर जीएसटी की दर 18 फीसदी है।
मोदी सरकार यह सोचकर जीएसटी सिस्टम लाई थी कि पूरे देश में एक टैक्स लागू हो और इससे कारोबार में भी आसानी होगी। साथ ही टैक्स कलेक्शन बढ़ाने के लक्ष्य से इसे लागू किया गया था। लेकिन, कई उत्पादों पर सैकड़ों क्लासिफिकेशन नॉर्म हैं, जो व्यवसायियों और उपभोक्ताओं को कन्फ्यूज करते हैं।
वाडीलाल इंडस्ट्रीज की अपील पर एएआर का जवाब
दरअसल ब्रांडेड परांठे बनाने वाली कंपनी वाडीलाल इंडस्ट्रीज ने अपनी दलील में कहा था कि HSN Code 1905 के तहत रोटी पर पांच फीसदी जीएसटी लगता है, इसलिए परांठे पर भी इसी दर से जीएसटी लगना चाहिए। गुजरात की कंपनी ने कहा कि चपाती, रोटी और परांठों में बहुत समानता है। इनको बनाने की प्रक्रिया भी मिलती-जुलती है।
इस पर गुजरात एएआर ने कहा कि रोटी रेडी टु ईट है, जबकि परांठा रेडी टु कुक है। वाडीलाल ने पैकट्स पर लिखा है कि रोटी को तीन से चार मिनट तक मध्यम आंच पर गरम करें। जबकि परांठे को गरम करने के दौरान इसमें तेल या बटर भी डालें। इसके अलावा गुजरात एएआर ने आटे के कंपोजीशन के आधार पर भी रोटी और परांठे में अंतर को स्पष्ट किया। परांठे में आटे की मात्रा 36 फीसदी से 62 फीसदी तक होती है।
लस्सी और फ्लेवर्ड मिल्क पर इतना लगता है टैक्स
इससे पहले गुजरात की एडवांस रूलिंग अथॉरिटी ने लस्सी और फ्लेवर्ड मिल्क पर ग्राहकों की कन्फ्यूजन दूर की थी। देश में लस्सी पर माल और सेवा कर (GST) नहीं लगेगा। लेकिन फ्लेवर्ड मिल्क पर ग्राहकों से 12 फीसदी का टैक्स वसूला जाता है। लस्सी दही, मसाले और पानी से बनती है और फ्लेवर्ड मिल्क की क्लासिफकेशन दही, लस्सी और छाछ से अलग है। इसलिए लस्सी पर जीएसटी नहीं लगेगा।