केरल ने केंद्र के खिलाफ दायर अपने मुकदमे की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट से पांच जजों की बेंच गठित करने का आग्रह किया है। केरल ने केंद्र की ओर से शुद्ध उधारी की सीमा (नेट बोरोइंग) तय करने का मुद्दा उठाते हुए यह मांग की है।
शुद्ध उधारी की सीमा तय करने की मांग पर सीजेआई ने केरल सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल को आश्वासन दिया कि इस मामले में संविधान पीठ गठित की जाएगी।
केरल सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख कर केंद्र के खिलाफ एक मुकदमे की सुनवाई के लिए पांच जजों की संविधान पीठ के जल्द गठन की मांग की है। यह मामला शुद्ध उधार की सीमा तय करने से जुड़ा है।
राज्य सरकार ने सवाल उठाया है कि क्या किसी राज्य को केंद्र सरकार और अन्य स्रोतों से अपनी उधारी सीमा बढ़ाने का अधिकार है।
मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और मनोज मिश्रा की पीठ को राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने बताया कि मामला 1 अप्रैल को संविधान पीठ को भेजा गया था और शीर्ष अदालत के अधिकारी पीठ के गठन के लिए ईमेल नहीं भेज रहे हैं।
सीजेआई ने कहा, "मैं इस पर गौर करूंगा।" हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने केरल को कोई अंतरिम निषेधाज्ञा देने से इनकार कर दिया, और कहा कि अंतरिम आवेदन के लंबित रहने के दौरान राज्य को 'पर्याप्त राहत' मिली है।
पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 293 का हवाला दिया था, जो राज्यों की ओर से उधार लेने से संबंधित है। अदालत ने कहा कि यह प्रावधान अब तक सर्वोच्च न्यायालय द्वारा किसी भी आधिकारिक व्याख्या के अधीन नहीं रहा है।
अदालत ने कहा, "चूंकि संविधान के अनुच्छेद 293 अब तक इस न्यायालय की ओर से किसी भी आधिकारिक व्याख्या के अधीन नहीं रही है, इसलिए हमारी सुविचारित राय में, उपरोक्त प्रश्न सीधे संविधान के अनुच्छेद 145(3) के दायरे में आते हैं। इसलिए, हम इन प्रश्नों को पांच न्यायाधीशों वाली पीठ को भेजना उचित समझते हैं।"