Karnataka: कर्नाटक सूचना आयोग (केआईसी) ने 14 अक्टूबर, 2014 को एक आदेश में आरटीआई अधिनियम की धारा 2 (एच) के तहत केजीए को सार्वजनिक प्राधिकरण घोषित किया था।केजीए ने इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
कर्नाटक गोल्फ एसोसिएशन (केजीए) की याचिका को खारिज करते हुए उच्च न्यायालय ने कर्नाटक सूचना आयोग (केआईसी) के फैसले को बरकरार रखा है कि यह सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत एक 'सार्वजनिक प्राधिकरण' है। कर्नाटक सूचना आयोग (केआईसी) ने 14 अक्टूबर, 2014 को एक आदेश में आरटीआई अधिनियम की धारा 2 (एच) के तहत केजीए को सार्वजनिक प्राधिकरण घोषित किया था।
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केजीए ने इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति एनएस संजय गौड़ा ने अंतिम दलीलें सुनीं और हाल ही में याचिका पर अपना फैसला सुनाया। इससे पहले दायर याचिकाओं में उच्च न्यायालय ने कहा था कि कर्नाटक सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत पंजीकृत सोसाइटियां जैसे बेंगलुरु टर्फ क्लब, मैसूर रेस क्लब, लेडीज क्लब और इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) जिन्हें सरकार ने पट्टे के आधार पर जमीन दी थी, वे सार्वजनिक प्राधिकरण हैं क्योंकि लीज के तहत भूमि देने से इन क्लबों को सरकार द्वारा काफी हद तक वित्तपोषित किया जा रहा है।
हाईकोर्ट ने केजीए पर अपने फैसले में कहा, 'इस याचिका के साथ पेश किए गए सरकारी आदेश से संकेत मिलता है कि 124 एकड़ जमीन याचिकाकर्ता संघ को 17 मई, 2010 से 30 साल की अवधि के लिए पट्टे पर दी गई है, बशर्ते याचिकाकर्ता नए पट्टे की अवधि के लिए लीज किराए के रूप में वार्षिक सकल आय का दो प्रतिशत का भुगतान करे।' उच्च न्यायालय ने कहा कि इस प्रकार केजीए एक सार्वजनिक प्राधिकरण है।