प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को तुर्किये के राष्ट्रपति रसेप तैयप एर्दोगन के साथ व्यापार और बुनियादी ढांचा संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की। मोदी ने रविवार को यहां संपन्न हुए जी-20 नेताओं के शिखर सम्मेलन से इतर एर्दोआन से मुलाकात की। मोदी ने कहा, 'हमने भारत और तुर्किए के बीच व्यापार और बुनियादी ढांचे के संबंधों को और मजबूत करने के तरीकों पर बात की गई। एर्दोआन ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए दोनों देशों के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाओं का इस्तेमाल करने का भरोसा जताया।
उन्होंने कहा, 'भारत दक्षिण एशिया में हमारा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और हम इस साल की शुरुआत में तुर्किये में हुए चुनाव के बाद मुख्य रूप से अर्थव्यवस्था और कई अन्य क्षेत्रों में सहयोग की बड़ी क्षमता का इस्तेमाल करने में सक्षम होंगे। एर्दोआन ने कहा कि यह गर्व की बात है कि भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भूमिका निभा रहा था। उन्होंने कहा कि वह पांच स्थायी और 15 'अस्थायी' सदस्यों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनाने के पक्ष में हैं।
उन्होंने कहा, 'उन 20 (5+15) को बारी-बारी से यूएनएससी का स्थायी सदस्य होना चाहिए। लेकिन जैसा कि आप जानते हैं, दुनिया सिर्फ पांच से बड़ी है। जब हम कहते हैं कि दुनिया पांच से बड़ी है तो हमारा मतलब यह है कि यह केवल अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन और रूस तक सीमित होकर नहीं रह सकता। एर्दोगन ने प्रस्ताव दिया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा में एक चक्रीय तंत्र होना चाहिए जहां प्रत्येक 195 देश संभावित रूप से सुरक्षा परिषद् के स्थायी सदस्य बन सकें।
जी-10 नेताओं के शिखर सम्मेलन के समापन के बाद एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए एर्दोगन ने यह भी कहा कि शिखर सम्मेलन से इतर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत की। उन्होंने अफ्रीकी संघ के जी-20 का सदस्य बनने की सराहना करते हुए कहा कि इससे समूह में नई जान आएगी।
भारत बनेगा यूएनएससी का स्थायी सदस्य तो तुर्किये को गर्व होगा
तुर्किये के राष्ट्रपति रसेप तैयप एर्दोगन ने रविवार को कहा कि अगर भारत जैसा देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) का स्थायी सदस्य बनता है तो तुर्किये को गर्व होगा। साथ ही एर्दोगन ने कहा कि सभी गैर-पी5 सदस्यों को बारी-बारी से सुरक्षा परिषद का सदस्य बनने का अवसर मिलना चाहिए।
सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों - चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका के संदर्भ में एर्दोगन ने कहा कि दुनिया पांच से बड़ी और बड़ी है।
उन्होंने कहा कि हमें गर्व होगा अगर भारत जैसा देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बन जाए। जैसा कि आप जानते हैं, दुनिया पांच से भी बड़ी है। उन्होंने कहा कि हमारे कहने का मतलब यह है कि यह केवल अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन और रूस के बारे में नहीं है। हम सुरक्षा परिषद में सिर्फ इन पांच देशों को नहीं रखना चाहते।