भारत ने विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की सालाना बैठक से इतर गुरुवार को दावोस में वैश्विक भलाई, लैंगिग समानता और आर्थिक समानता के लिए एक नए गठबंधन की घोषणा की। इस दौरान विश्व आर्थिक मंच के संस्थापक और चेयरमैन क्लॉस श्वाब भी मौजूद थे। उन्होंने इस पहल का समर्थन करने की भी बात कही है। उद्योग मंडल सीआईआई की ओर से आयोजित डब्ल्यूईएफ की सालाना बैठक से इतर आयोजित स्वागत समारोह में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, हरदीप सिंह पुरी व अन्य ने भी शिरकत की।
महिला व बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि इस गठबंधन का विचार जी-20 नेताओं के घोषणापत्र और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रतिपादित महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता से आया है। ईरानी ने डब्ल्यूईएफ को भारत का बहुत मजबूत समर्थन करने के लिए भी बधाई दी।
उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री मोदी ने न केवल उच्च विकास दर दी है और महंगाई को नियंत्रित किया है, बल्कि 80 करोड़ भारतीय नागरिकों की खाद्य सुरक्षा भी सुनिश्चित की है। इसका विदेशों में भी लोगों ने समर्थन किया है। उन्होंने कहा, "यह गठबंधन वैश्विक भलाई के लिए है जैसा कि नाम से पता चलता है।"
ईरानी ने देश में सामाजिक क्रांति लाने, महिलाओं को सुशासन के केंद्र में रखने के लिए प्रधानमंत्री के एजेंडे की भी सराहना की। मंत्री पुरी ने कहा कि भारत का डब्ल्यूईएफ के साथ हमेशा से विशेष संबंध रहा है। उन्होंने कहा कि भारत महिला केंद्रित विकास से महिला नीत विकास की ओर बढ़ गया है।
डब्ल्यूईएफ प्रमुख श्वाब ने कहा कि जलवायु, संघर्ष और एआई के अलावा दावोस में चर्चा के मुख्य विषयों में से एक भारत भी है। उन्होंने कहा, "हम न केवल भारत की पहल से गठबंधन का समर्थन करेंगे बल्कि इसका एक मजबूत भागीदार बनेंगे।" उन्होंने चुनावी साल में इतना मजबूत प्रतिनिधिमंडल भेजने के लिए भी भारत को धन्यवाद दिया।
वैश्विक भलाई के लिए बने इस गठबंधन को मास्टरकार्ड, उबर, टाटा, टीवीएस, बायर, गोदरेज, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, नोवार्तिस, आईएमडी लॉसेन और सीआईआई के माध्यम से उद्योग जगत के 10,000 से अधिक भागीदारों से समर्थन मिला है।
बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन द्वारा समर्थित इस गठबंधन को सीआईआई सेंटर फॉर वुमन लीडरशिप की ओर से संचालित किया जाएगा। विश्व आर्थिक मंच एक नेटवर्क पार्टनर के रूप में और इन्वेस्ट इंडिया एक संस्थागत भागीदार के रूप में इस अभियान को समर्थन देंगे।