नवरात्र की शुरुआत हो गई है। दस दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में उत्तर भारत में जहां रामलीला का आयोजन होता है, वहीं कोलकाता में दुर्गापूजा की शोभा होती है, जबकि महाराष्ट्र और गुजरात में डांडिया गरबा खेला जाता है। इस साल इन दस दिनों में कारोबारियों को पूरे देश में 50 हजार करोड़ रुपये के कारोबार होने की उम्मीद है। अकेले मुंबई एमएमआर क्षेत्र (इसमें मुंबई, ठाणे, कल्याण डोंबिवली, नवी मुंबई, उल्हासनगर, भिवंडी जैसे अन्य उपनगर शामिल है) में लगभग 8 हजार करोड़ रुपये के व्यापर की उम्मीद है।
त्योहारों के दौरान बाजार की रौनक बढ़ने की उम्मीद
कॉन्फडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय मंत्री एवं अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने बताया कि नवरात्र के दस दिन के उत्सव पर देश भर से 50 हजार करोड़ रुपये का कारोबार होने की उम्मीद है। पिछले वर्ष दस दिन का यह व्यापार लगभग 35 हजार करोड़ रुपये का था। उन्होंने बताया कि अकेले मुंबई एमएमआर में ही लगभग 8 हज़ार करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार होगा। इन उत्सवों के दौरान बाजारों में रौनक बढ़ने की उम्मीद है, जिससे व्यापारियों को काफी फायदा होगा।
शंकर ठक्कर बताते हैं कि इन दस दिनों में पंडाल बनाने के लिए टेंट हाउस, सजाने के लिए सजावटी कंपनियां आदि को बढ़ा व्यापार मिलता है। इस अवसर पर देश भर में बड़ी मात्रा में मेले तथा उत्सव संबंधी आयोजन होते हैं जिसमें लाखों लोग भाग लेते हैं। यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक एकता और व्यापारिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहित करते हैं। उनका कहना है कि नवरात्रि और रामलीला उत्सव न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि व्यापारिक दृष्टिकोण से भी लाभकारी होते हैं।
त्योहारों पर बिकने वाले उत्पादों में भारतीय उत्पादों का रहेगा बोलबाला
देश भर में इस दौरान रामलीला, गरबा और दुर्गापूजा के एक लाख से अधिक छोटे-बड़े अयोजन होते हैं। इस तरह के कार्यक्रमों से लाखों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार भी मिलता है। कैट के राष्ट्रीय महामंत्री तथा चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने बताया कि त्योहारों पर विशेषकर बेचे जाने वाले उत्पादों में भारतीय उत्पाद होंगे। प्रधानमंत्री की पहल पर वोकल फॉर लोकल को देखते हुए ग्राहकों को देश में बने उत्पादों को खरीदना चाहिए। लोगों का अब चीन से बने सामानों से मोहभंग हो चुका है। आत्मनिर्भर भारत अभियान ने देश भर में भारतीय सामानों की गुणवत्ता को बढ़ाया है। देश में बने हुए उत्पाद अब विदेशों के उत्पादों से बेहतर है यही वजह है कि उपभोक्ता का घरेलू उत्पादों की खरीदारी कर रहे हैं।