अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने वित्त वर्ष 2019 और 2020 के लिए भारत की विकास दर के अनुमान को एक बार फिर से घटा दिया है। हालांकि भारत की जीडीपी, चीन से काफी आगे रहेगी। इससे केंद्र सरकार के पांच ट्रिलियन इकोनॉमी बनने की कवायद को भी झटका लग सकता है।
मंगलवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, आईएमएफ ने अपने वर्ल्ड इकोनॉमिक अपडेट में कहा है कि वित्त वर्ष 2019 के लिए सात फीसदी और 2020 में 7.2 फीसदी का अनुमान लगाया है। इसमें 0.30 फीसदी की कटौती की गई है। इससे भारत की घरेलू डिमांड अनुमान से ज्यादा कमजोर रहने के संकेत मिलते हैं।
चीन में टैरिफ वार और कमजोर एक्सटर्नल डिमांड से पहले से ही स्ट्रक्चरल स्लोडाउन से जूझ रही इकोनॉमी पर दबाव बढ़ा है। इससे 2019 व 2020 में ग्रोथ क्रमशः 6.2 फीसदी व 6 फीसदी रहने का अनुमान है, जो अप्रैल के वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक से 0.10 फीसदी कम है।
विकास दर को घटाने के अनुमान से केंद्र सरकार की देश को पांच ट्रिलियन इकोनॉमी बनाने की कवायद को भी झटका लग सकता है। अगर अर्थव्यवस्था में मंदी का दौर देखने को या फिर धीमी रफ्तार रहेगी तो इसका असर भविष्य में भी देखने को मिलेगा। फिलहाल देश में कई सेक्टरों में उत्पादन लगभग ठप हो गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि लोग पुराने स्टॉक को भी नहीं खरीद रहे हैं। पांच ट्रिलियन इकोनॉमी बनाने के लिए विकास दर में तेजी रखने के लिए कोशिशों को जारी रखना होगा।