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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: देश में घर खरीदने वालों को धोखा दिया जा रहा, बिल्डर-खरीदार समझौतों में आए एकरूपता

Mon, 08 Jul 2024 09:01 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Supreme Court: प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की ओर से समान बिल्डर-खरीदार समझौते तैयार करने के लिए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को टिप्पणी करते हुए कहा कि देश में बिल्डर-खरीदार समझौतों में एकरूपता लाने की आवश्यकता है क्योंकि पूरे भारत में बिल्डर संपत्ति खरीदारों को धोखा दे रहे हैं। अदालत ने यह टिप्पणी अश्विनी कुमार उपाध्याय बनाम भारत संघ मामले में की। 

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प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की ओर से समान बिल्डर-खरीदार समझौते तैयार करने के लिए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।
 
सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा, "बिल्डरों की ओर से खरीदारों को धोखा दिया जा रहा है और यही कारण है कि अब एकरूपता की आवश्यकता है।' इस मामले में न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता देवाशीष भारुका ने पहले अदालत को बताया था कि बिल्डर-खरीदार समझौतों के मसौदे के साथ एक अंतिम स्थिति रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखी गई है। अदालत को यह भी बताया गया कि इस बारे में राज्य सरकारों के सुझाव मिले हैं और उन्हें भी रिपोर्ट में शामिल किया गया है।
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अदालत ने कहा, 'हमें न्यायमित्र की रिपोर्ट देखने की जरूरत है और हम क्रेडाई की आपत्तियों को देखेंगे। हमें इसे रिकॉर्ड पर लेना होगा होगा और कहना होगा कि सभी राज्यों को इसे अमल में लाने की जरूरत है। इसमें एकरूपता की आवश्यकता है, अदालत ने मामले में आगे की सुनवाई के लिए 19 जुलाई की तारीख तय की है। कोर्ट ने अक्टूबर 2021 में इस मामले में नोटिस जारी किया था।
 
न्यायालय ने इस मामले में उद्योग संघों सहित सभी हितधारकों को केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय को इन मॉडल समझौतों पर अपने सुझाव देने की भी अनुमति दी थी।

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