भारत ने कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतों पर ओपेक व सहयोगी देशों को आगाह किया है। भारत ने सोमवार को कहा कि महंगे पेट्रोल-डीजल के दबाव से उबरने के लिए हम वैकल्पिक ईंधन पर जोर देंगे। इसका नुकसान तेल उत्पादक देशों को भी होगा। उन्हें अपने उपभोक्ताओं की स्थिति समझ उत्पादन बढ़ाकर कीमतों पर लगाम कसनी होगी।
पेट्रोलियम मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी ने कहा कि अप्रैल, 2020 में जब मांग रिकॉर्ड निचले स्तर पर कीमतें 19 डॉलर तक चली गई थी, तब तेल निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) व रूस सहित अन्य सहयोगी देशों ने उत्पादन घटा दिया था। अब दुनियाभर में ईंधन की मांग तेजी से बढ़ रही है। बावजूद इसके ओपेक व सहयोगी देश उत्पादन नहीं बढ़ा रहे, जिससे सोमवार को ब्रेंट क्रूड 85.67 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया।
वैकल्पिक ईंधन पर जोर बढ़ाया तो ओपेक को ही नुकसान
यह भारत जैसे बड़े आयातक देशों के आर्थिक सुधारों को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। हम अपनी कुल जरूरत का 85 फीसदी तेल आयात करते हैं, जिसमें से 65 फीसदी तेल पश्चिम एशियाई देशों से आता है। अगर हमने वैकल्पिक ईंधन पर जोर देना शुरू किया, तो इसका नुकसान ओपेक व अन्य उत्पादक देशों को भी उठाना पड़ेगा।
ज्यादा आपूर्ति व भुगतान समय बढ़ाने की मांग
भारत ने सिर्फ कीमतों पर विचार का सुझाव नहीं दिया, बल्कि ज्यादा आपूर्ति व भुगतान समय बढ़ाने की भी मांग की है। अभी सरकारी तेल कंपनियों को सालाना तय मात्रा में ही क्रूड का निर्यात किया जाता है। सऊदी अरब व इराक जैसे देश भुगतान के लिए भी 30 दिन का समय देते हैं। भारत ने कहा है कि प्रतिबंधों से पहले ईरान 90 दिन का समय देता था, लिहाजा अन्य उत्पादक देशों को भी भुगतान समय बढ़ाना होगा। इस हफ्ते होने वाले इंडिया एनर्जी फोरम में भारत एक बार फिर महंगे तेल का मुद्दा उठाएगा।
ओपेक की मजबूरी, चाहकर भी नहीं बढ़ा पा रहे उत्पादन
ओपेक व सहयोगी देशों के संगठन ने कहा है कि हमने उत्पादन में कटौती को 115 फीसदी घटा दिया है और अक्तूबर व नवंबर में चार लाख बैरल प्रतिदिन का उत्पादन बढ़ाने की कोशिश भी कर रहे हैं। बावजूद इसके निवेश की कमी व मरम्मत कार्योें की वजह से अंगोला, नाइजीरिया जैसे देश उत्पादन नहीं बढ़ा पा रहे। इस कारण तय लक्ष्य को पाना मुश्किल हो रहा। सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अबदुलाजीज बिन सलमान ने कहा, हम उत्पादन बढ़ाने की लगातार कोशिश कर रहे हैं।
कोरोना महामारी के चलते गिरे थे दाम
अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतें पिछले साल अप्रैल में 19 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक गिर गई थीं, क्योंकि अधिकांश देशों ने कोरोना संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए लॉकडाउन लगाया था। इस साल मांग में सुधार हुआ है क्योंकि संक्रमण के खिलाफ टीकाकरण ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं को दोबारा पटरी पर लाने का काम किया है।
अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड तब से बढ़कर 85.67 डॉलर प्रति बैरल हो गया है। अधिकारी ने कहा कि तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल के हफ्तों में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर, अमेरिका, रूस और बहरीन से तेल की ऊंची कीमतों के मुद्दे पर बात की है। पुरी ने ओपेक के महासचिव और सऊदी अरब व अन्य देशों में अपने समकक्षों के साथ अपनी बैठकों में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर भारत की गंभीर चिंताओं को सामने रखा।