सरकार ऑटो कलपुर्जे, इस्पात और कपड़ा जैसे क्षेत्रों में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए घोषित उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना को अधिसूचित करने पर विचार कर रही है।
इसलिए शुरू की गई पीएलआई योजना
उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) में अतिरिक्त सचिव सुमिता डावरा ने कहा कि सरकार ने विनिर्माण के लिए प्रोत्साहन आधारित मॉडल को बढ़ावा देने, उन्नत प्रौद्योगिकियों को आकर्षित करने, बड़े स्तर पर उत्पादन और गुणवत्ता मानकों को हासिल करने के लिए पीएलआई योजना शुरू की थी।
उन्होंने पीएचडीसीसीआई द्वारा आयोजित वेब गोष्ठी 'भारत की विनिर्माण और व्यापार प्रतिस्पर्धा पर पीएलआई योजना का प्रभाव' में कहा, 'हम सख्त समयसीमा के साथ आगे बढ़ रहे हैं और अब हम ऑटो कलपुर्जे, इस्पात और कपड़े के लिए योजना को अधिसूचित करेंगे।' उन्होंने आगे कहा कि महामारी के इस दौर में बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने कुछ भौगोलिक क्षेत्रों में अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं को केंद्रित करने की सीमाओं को महसूस किया है।
पांच सालों में 13 क्षेत्रों के लिए पीएलआई योजना को मिली मंजूरी
डावरा ने कहा, 'इसलिए भारत इन पीएलआई क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करके वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनने के लिए खुद को तैयार कर रहा है।' सरकार ने पिछले साल पांच साल की अवधि में लगभग दो लाख करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ 13 क्षेत्रों के लिए पीएलआई योजना को मंजूरी दी थी।
दवा उद्योग के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना को लेकर दिशानिर्देश जारी
सरकार ने मंगलवार को दवा उद्योग के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना से जुड़े परिचालन दिशानिर्देश जारी किए। इस पहल का उद्देश्य क्षेत्र में निवेश और उत्पादन बढ़ाकर भारत की विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाना है। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि औषधि विभाग ने दवा उद्योग के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी। इसके तहत 15,000 करोड़ रुपये के व्यय की मंजूरी दी गई है। इसमें उन इकाइयों को वैश्विक चैंपियन बनाने की परिकल्पना की गई है जिनमें अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करके आकार और पैमाने में बढ़ने की क्षमता है।