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जीएसटी को अब और सरल बनाएगी सरकार, होंगे और सुधार

Thu, 24 Oct 2019 06:03 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला

सार

  • सीतारमण ने कहा, राज्यों को भी भारत में कारोबारी परिदृश्य में सुधार की दिशा में प्रयास करने होंगे
  • मोदी सरकार से अफ्रीकी देशों की कतार में था, अब यूरोपीय देशों से कर रहा होड़: विश्व बैंक अधिकारी
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- फोटो : SELF
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विस्तार
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कारोबार सुगम देशों की सूची में 63वें पायदान पर पहुंचने के बाद अब भारत की नजर टॉप 50 पर है। इस क्रम में सरकार आगे भी कई सुधार कर सकती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कहा कि सरकार वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को सरल बनाने के प्रयास करेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे कारोबार सुगम देशों की सूची में भारत की रैंकिंग में आगे और भी सुधार देखने को मिलेगा।

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संवाददाताओं से बातचीत में सीतारमण ने कहा कि राज्यों को भी भारत में कारोबारी परिदृश्य में सुधार की दिशा में प्रयास करने होंगे। इसमें विशेष रूप से संपत्तियों का पंजीकरण शामिल है। उन्होंने कहा कि दिवालियापन कानून (आईबीसी) लागू होने से भारत की कारोबारी रैंकिंग में सुधार में मदद मिली।

वित्त मंत्री ने कहा कि विश्व बैंक की अगली रैंकिंग में कोलकाता और बंगलूरू भी शामिल होंगे। अभी तक सिर्फ दिल्ली और मुंबई को शामिल किया जाता था। मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन ने कहा कि कर्ज वितरण के लिए बैंकों द्वारा शुरू किए गए आउटरीच कार्यक्रम से एमएसएमई सेक्टर को कर्ज की उपलब्धता में सुधार में मदद मिली है।

भारत को और सुधार करने की जरूरत: विश्व बैंक

विश्व बैंक के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि यदि भारत टॉप 50 में शामिल होना चाहता है तो उसे तीन से चार साल में कई ‘साहसी सुधार’ करने होंगे। विश्व बैंक के निदेशक (विकास अर्थशास्त्र) साइमन दजानकोव ने कहा, ‘दिवालियापन कानून, अनुबंध कानून, कर सुधारों का वर्तमान एजेंडा अगले साल या इस साल के बाद पूरा हो जाएगा। इसके बाद भारत टॉप 50 या टॉप 40 के भीतर भी आ सकता है। हालांकि भारत को इसके लिए लैटिन अमेरिका और यूरोप की अन्य अर्थव्यवस्थाओं से तगड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा।’ दजानकोव ने कहा, ‘लेकिन इससे आगे जाने के लिए कई और सुधार करने की जरूरत होगी।’

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उन्होंने कहा कि भारत को टॉप 50 से टॉप 25 में आने के लिए नए सुधार शुरू करने होंगे।

टॉप 25 में आने में लगेंगे 3-4 साल

मोदी सरकार के पहले कार्यकाल द्वारा शुरू किए गए सुधारों से कारोबार सुगम देशों की सूची में आगे आने में मदद मिली। विश्व बैंक के अधिकारी ने कहा, ‘टॉप 25 में आना संभव है, लेकिन भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में यह खासा मुश्किल है।’ उन्होंने कहा कि टॉप 25 में आने के लिए नए सुधार करने होंगे, जिसमें तीन-चार साल और लगेंगे।

मोदी सरकार से पहले 15 साल तक कुछ नहीं हुआ 

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के 2014 में सत्ता में आने से पहले 15 साल के दौरान कारोबार अनुकूल नीतियों पर कोई काम नहीं हुआ। दजानकोव ने कहा, ‘वास्तव में तब भारत में कोई काम नहीं हुआ।’ उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के प्रयासों से लैटिन अमेरिका और यूरोपीय देशों से होड़ करने लगा है, जबकि इससे पहले वह अफ्रीकी देशों की कतार में खड़ा था। उन्होंने कहा, ‘अब प्रतिस्पर्धा खासी बढ़ गई है।’

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