वैश्विक बाजारों में पीली धातु की कीमतों में गिरावट के बीच दिल्ली सर्राफा बाजार में गुरुवार को सोना 250 रुपये की गिरावट के साथ 73,700 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। पिछले सत्र में सोना 73,950 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक (जिंस) सौमिल गांधी ने कहा, ''दिल्ली के बाजारों में 24 कैरेट सोने की हाजिर कीमत में पिछले दिन के बंद भाव के मुकाबले 250 रुपये की गिरावट के साथ 73,700 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार होता दिखा। हालांकि, चांदी की कीमत 86,500 रुपए प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही।"
बुधवार को रामनवमी के अवसर पर कॉमोडिटी बाजार बंद थे। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कॉमेक्स पर सोने का हाजिर भाव 13 डॉलर की गिरावट के साथ 2,375 डॉलर प्रति औंस रह गया। गांधी ने कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल की टिप्पणी के बाद अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती में उम्मीद से अधिक समय लगने का संकेत मिलने के बाद गुरुवार को सोने की कीमतों में गिरावट आई।
हालांकि, चांदी मामूली तेजी के साथ 28.25 डॉलर प्रति औंस पर चल रही थी। पिछले सत्र में सोना 28.20 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ था। मध्य पूर्व में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव से सोने में अस्थिरता बने रहने की उम्मीद है। अगर यह स्थिति जारी रही तो डॉलर को समर्थन मिल सकता है, जिससे सोने की कीमतें कम हो सकती हैं।
शोध विश्लेषक व एलकेपी सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष (जिंस व मुद्रा) जतीन त्रिवेदी ने कहा, यदि ईरान और इस्राइल के बीच तनाव कम होता है तो सोने की कीमत घटकर 69,500 रुपये रह सकती है। मंगलवार को फेड प्रमुख पॉवेल ने कहा कि केंद्रीय बैंक अपनी मुख्य ब्याज दर में कटौती करने की प्रतीक्षा कर रहा है, जो 2001 के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर है। फेड प्रमुख ने कहा कि उन्हें और अधिक पुख्ता करने कि आवश्यकता है कि मुद्रास्फीति अपने 2 प्रतिशत के लक्ष्य की ओर लगातार नीचे जा रही है। उच्च दरें सभी प्रकार के निवेशों की लागत पर असर डालती हैं और आगे चलकर मंदी का खतरा बढ़ाती हैं।
पॉवेल ने कहा, "हाल के आंकड़ों ने स्पष्ट रूप से हमें अधिक आत्मविश्वास नहीं दिया है और इसके बजाय इस बात का संकेत दिया है कि दरों को घटाने के फैसले में उम्मीद से अधिक समय लग सकता है।" पॉवेल ने यह बात इस साल के मुद्रास्फीति के आंकड़ों में तेजी दिखने के बाद कही है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि उच्च मुद्रास्फीति बनी रहती है, तो फेड दरों को "जब तक जरूरी हो" स्थिर रखेगा। हालांकि उन्होंने कहा कि अगर नौकरी बाजार अप्रत्याशित रूप से कमजोर होता है तो फेड दरों में कटौती कर सकता है।