केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) को और मजबूत बनाने की जरूरत है। उन्होंने पर्याप्त संसाधन जुटाने के साथ-साथ आईएमएफ में कोटा लागू करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, वैश्विक वित्तीय सुरक्षा जाल और जलवायु कार्रवाई के केंद्र में एक मजबूत, कोटा-आधारित और पर्याप्त रूप से संसाधनयुक्त होना चाहिए।
वोटिंग अधिकार बढ़ने की उम्मीद
कोटा की 16वीं सामान्य समीक्षा (जीआरक्यू) के बाद अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को अधिक हिस्सेदारी मिलने की उम्मीद है। आईएमएफ के प्रस्ताव के अनुसार, कोटा में किसी भी समायोजन के परिणामस्वरूप विश्व अर्थव्यवस्था में उनकी सापेक्ष स्थिति के अनुरूप उभरते देशों के वोटिंग अधिकार बढ़ने की उम्मीद है।
पहली तिमाही के दौरान 7.8 प्रतिशत की वृद्धि
मोरक्को के मराकेश में 'नीतिगत चुनौतियों पर संवाद' विषय पर आईएमएफ बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की बैठक में वित्त मंत्री सीतारमण ने वैश्विक विकास में मंदी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, भारत 2023-24 की पहली तिमाही के दौरान 7.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
गोलमेज सम्मेलन की जरूरत
बढ़ती वैश्विक ऋण कमजोरियों के संबंध में वित्त मंत्री ने ऋण संकट में सदस्यों के साथ जुड़ने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने ऋण मुद्दों और आईएमएफ नीति में सुधारों पर सहयोग को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक संप्रभु ऋण गोलमेज सम्मेलन की जरूरत पर भी बात की।
वसुधैव कुटुंबकम का जिक्र
वित्त मंत्रालय ने सीतारमण के बयान पर कहा, उन्होंने वैश्विक वित्तीय सुरक्षा जाल के केंद्र में एक मजबूत, कोटा-आधारित और पर्याप्त रूप से संसाधन वाले आईएमएफ की वकालत की है। वित्त मंत्री ने जिम्मेदारियों और संबंधित क्षमताओं के सिद्धांतों पर जलवायु कार्रवाई के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक समुदाय की समन्वित प्रतिक्रिया 'वसुधैव कुटुंबकम' - एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य - की भावना में बहुपक्षवाद को बढ़ावा देगी।