तमिलनाडु सरकार ने किसानों के कल्याण के लिए बड़े एलान किए हैं। कृषि मंत्री एमआरके पन्नीरसेल्वम ने शनिवार को विधानसभा में कहा कि सरकार 29 गैर-डेल्टा जिलों में कर, कुरुवई और सोरनवारी मौसम के दौरान धान के रकबे और खाद्यान्न उत्पादन को बढ़ाने के लिए 102 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज लागू करेगी। इसके अलावा खेती की नई तकनीक सीखने के लिए 100 प्रगतिशील किसानों को चीन, जापान और वियतनाम की यात्रा कराई जाएगी।
विधानसभा में 2025-26 के लिए कृषि बजट पेश करते हुए कृषि मंत्री पन्नीरसेल्वम ने कहा कि विशेष पैकेज के तहत किसानों को मशीन से बुवाई और गुणवत्ता प्रमाणित बीजों के लिए सब्सिडी दी जाएगी। कुरुवई के दौरान रकबा और खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने के लिए डेल्टा जिलों के किसानों को भी पैकेज दिया जाएगा। इसके लिए 58 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की जाएगी। कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों के लिए एक अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर यात्रा की व्यवस्था करेगी। ताकि उन्हें धान का उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाने में मदद मिल सके।
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मंत्री ने कहा कि किसानों को नई तकनीक सीखने और अपने खेतों में लागू करने में मदद करने के लिए, 100 प्रगतिशील किसानों को जापान, चीन और वियतनाम की एक्सपोजर यात्रा पर ले जाया जाएगा। इसके लिए दो करोड़ रुपये आवंटित किए जाएंगे। इसके अलावा सरकार चंदन, लाल चंदन, महोगनी और शीशम जैसे मूल्यवान पेड़ों की खेती को बढ़ावा देने और पंजीकरण, कटाई, परिवहन और लकड़ी के विपणन से संबंधित प्रक्रियाओं को सरल बनाने, हरित तमिलनाडु प्राप्त करने के लिए तमिलनाडु कृषि वानिकी नीति को शुरू करेगी। कृषि मंत्री ने कहा कह पेड़ बारिश में सहायता करके फसल उत्पादकता बढ़ाते हैं और बायोमास बहाकर मिट्टी की सेहत को अच्छा करते हैं। इसलिए उच्च मूल्य वाले पेड़ों की खेती के माध्यम से किसानों को अतिरिक्त आय प्रदान करने के लिए कृषि वानिकी को प्रोत्साहित किया जाता है।
एक हजार किसान सेवा केंद्रों की होगी स्थापना
उन्होंने एलान किया कि 10-20 लाख रुपये के बीच अनुमानित लागत पर 1,000 मुख्यमंत्री किसान सेवा केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इसमें 30 प्रतिशत सब्सिडी होगी जो प्रति केंद्र 3-6 लाख रुपये होगी। इस योजना के लिए राज्य बजट से 42 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की जाएगी। ये केंद्र कृषि सहायता के लिए काम करेंगे, जो बीज, उर्वरक और अन्य कृषि आवश्यकताओं जैसे आवश्यक इनपुट प्रदान करेंगे। इसके अलावा फसल उत्पादकता बढ़ाने, कीट और रोग प्रबंधन, आधुनिक तकनीकों को अपनाने और मूल्य-संवर्धन तकनीकों पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्रदान देंगे। उन्होंने कहा कि कृषि स्नातकों और डिप्लोमा धारकों की विशेषज्ञता का लाभ किसानों के कल्याण और कृषि विकास के लिए उठाया जाएगा।
ग्रीष्मकालीन जुताई को देंगे बढ़ावा
कृषि मंत्री ने कहा कि ग्रीष्मकालीन जुताई बढ़ाने के लिए 2025-2026 के दौरान राज्य कोष से 24 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। ताकि 2,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से तीन लाख एकड़ भूमि को कवर किया जा सके। वहीं 20 जिलों के 63 हजार पहाड़ी किसानों के कल्याण के लिए 22.80 करोड़ रुपये की लागत से मलाईवाज उझावर मुनेत्र थिट्टम (पहाड़ी किसान विकास योजना) लागू की जाएगी। योजना में लघु बाजरा की खेती, आदानों का वितरण, सब्जी फसलों में क्षेत्र विस्तार, कृषि मशीनरी, मूल्य संवर्धन, सूक्ष्म सिंचाई और एकीकृत कृषि प्रणाली और इन लाभार्थियों को किसान क्रेडिट कार्ड प्रदान किए जाएंगे।
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मक्का का उत्पादन बढ़ेगा, फसल बीमा योजना होगी लागू
कृषि मंत्री पन्नीरसेल्वम ने कहा कि 40.27 करोड़ रुपये से 1.87 लाख एकड़ क्षेत्र में मक्का का उत्पादन बढ़ाया जाएगा। 12 करोड़ रुपये से 37 जिलों में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसल के नुकसान स्थिति से किसानों को बचाने और उनकी आजीविका को बनाए रखने के लिए फसल बीमा योजना लागू की जाएगी। पिछले चार साल में कृषि और बागवानी फसलों को हुए नुकसान के लिए 20.84 लाख किसानों को राहत के रूप में 1,631.53 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं। जबकि पिछले चार वर्षों में 30 लाख किसानों को फसल बीमा मुआवजे के रूप में 5,242 करोड़ रुपये प्रदान किए गए।
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