सोमवार को जारी सेबी के अध्ययन के अनुसार पिछले तीन वित्तीय वर्षों (FY22 से FY24) के दौरान 1.13 करोड़ खुदरा एफएंडओ ट्रेडर्स को संयुक्त रूप से 1.81 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। सेबी ने अपने अध्ययन में कहा, "व्यक्तिगत श्रेणी के ट्रेडर्स (खुदरा कारोबारियों) ने तीन वर्षों की अवधि में प्रति व्यक्ति औसतन 1.60 लाख रुपये का घाटा उठाया। नुकसान में रहने वालों की बात करें तो उन्हें औसतन लगभग 2 लाख रुपये प्रति व्यक्ति का घाटा हुआ। जबकि लाभ कमाने वालों के लिए प्रति व्यक्ति औसत लाभ 3 लाख रुपये प्रति व्यक्ति रहा।"
सेबी के हालिया अध्ययन के अनुसार डेरिवेटिव मार्केट में एल्गो ट्रेडिंग का इस्तेमाल बढ़ा है। एफआईआई और प्रोप्राइटरी ट्रेडर्स ने एल्गोरिदम यानी अल्गो ट्रेडिंग का उपयोग करके वित्त वर्ष 24 में सामूहिक रूप से लगभग 59,000 करोड़ रुपये का लाभ कमाया, हालांकि खुदरा निवेशकों को इससे घाटा उठाना पड़ा। इस तरह की ट्रेडिंग में सौंदों को पूरा करने के निर्देश देने के लिए बॉट्स या कम्प्यूटर प्रोग्राम का इस्तेमाल किया जाता है।
सेबी अनुसार पिछले वित्त वर्ष में, एल्गो का उपयोग करने वाले प्रोप ट्रेडर्स ने लगभग 32,000 करोड़ रुपये का लाभ कमाया, जबकि एल्गो समर्थित एफआईआई ने 26,900 करोड़ रुपये का लाभ कमाया।
सेबी की रिपोर्ट के अनुसार एफपीआई और प्रोप्राइटरी ट्रेडर्स ने एल्गोरिदम या बॉट्स का इस्तेमाल कर ज्यादा मुनाफा कमाया। वित्त वर्ष 24 में एफपीआई का 97% मुनाफा और प्रोप्राइटरी ट्रेडर्स का 96% मुनाफा एल्गो इकाइयों से आया।" 376 में से लगभग 306 एफआईआई ने एल्गोरिदम के ज़रिए कारोबार किया, जबकि 626 में से 347 प्रोप्राइटरी ट्रेडर्स ने एल्गोरिदम के जरिए कारोबार किया। दूसरी ओर, 95.7 लाख व्यक्तिगत ट्रेडर्स में से केवल 13% ने एल्गोरिदम का इस्तेमाल किया।
जहां तक खुदरा व्यापारियों का सवाल है, एल्गो से भी उन्हें फायदा हासिल नहीं हुआ। एल्गो समर्थित व्यक्तिगत व्यापारियों को भी वित्त वर्ष 24 में 13,900 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल डेरिवेटिव ट्रेडिंग में खुदरा व्यापारियों को कुल मिलाकर 41,544 करोड़ रुपये का घाटा हुआ।