बड़े नोटों की तुलना में छोटे नोटों की छपाई पर सरकार का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी कारण एक, दो और पांच रुपये के नोट पहले ही बंद किए जा चुके हैं। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से मिली जानकारी के अनुसार, 10 रुपये के एक नोट की छपाई में 70 पैसे खर्च होते हैं, जबकि 2,000 रुपये का एक नोट 4.18 रुपये में छपता है।
लेकिन दोनों नोटों के मूल्य में भारी फर्क है। इसके अलावा नोटों की छपाई वाले कागजों की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है। पहले 10 रुपये मूल्य का एक नोट 40 पैसे में छपता था, जो अब 70 पैसे में छपता है। इस कारण भी छोटे नोटों की छपाई का खर्च बड़े नोटों की छपाई के मुकाबले बढ़ रहा है।
छपाई खर्च में 135.82 रुपये का अंतर
दरअसल, 2,000 रुपये का एक नोट 10 रुपये के 200 नोटों के बराबर है। आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, 2,000 रुपये के बराबर 10 रुपये के नोटों की छपाई पर 140 रुपये का खर्च आता है। इस हिसाब से दोनों की छपाई में 135.82 रुपये का अंतर आता है, जो काफी अधिक है।
वहीं, आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार ने एक, दो और पांच रुपये के नोट समय रहते इसलिए बंद कर दिए थे क्योंकि उनके छपाई का खर्च लगातार बढ़ रहा था। एक समय ऐसा भी आया, जब एक रुपये के नोट की छपाई उसके मूल्य से ज्यादा हो गई।
छपाई पर सालाना 21,000 करोड़ खर्च
आरटीआई कार्यकर्ता गौरव अग्रवाल की ओर से मांगी गई जानकारी के अनुसार, बड़े नोटों की छपाई छोटे नोटों की तुलना में काफी कम होती है। इस कारण सरकार को काफी नुकसान हो रहा है। वहीं, आर्थिक विशेषज्ञ रवि सिंह का कहना है कि कुल मुद्रा की छपाई में सालाना 20 से 21 हजार करोड़ रुपये का खर्च आता है।
यह आकलन कुछ साल पहले आरबीआई की ओर से ही कराया गया था। इसी के मद्देनजर नोटों पर लिखने, उनपर दाग लगाने और उन्हें गंदा करने के खिलाफ नियम बनाए गए। इस नियम के आने के बाद बैंकों ने ऐसे खराब नोटों को लेना बंद कर दिया, जिससे सरकार को खराब नोटों के बदले नए नोटों की छपाई पर खर्च नहीं करना पड़ रहा है।