Ex-MP Land deal: सीबीआई ने अपनी प्राथमिकी में आरोप लगाया था कि एक जनवरी 2007 से 31 दिसंबर 2010 के बीच एक्सिस बैंक में श्रीधर के तीन खातों में 11.9 करोड़ रुपये जमा किए गए। यह पैसा कथित तौर पर कांग्रेस के पूर्व सांसद बालाशोवरी वल्लभनेनी का था और इसे 12.5 करोड़ रुपये के भूमि सौदे के लिए खर्च किया जाना था।
सीबीआई की एक विशेष अदालत ने वायुसेना के एक पूर्व स्क्वाड्रन लीडर को फंड्स के दुरुपयोग और आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी ठहराया है। उनपर कथित तौर एक पूर्व कांग्रेस सांसद की लैंड डील में मदद करने का आरोप हैं। पूर्व स्क्वाड्रन लीडर पर आरोप है कि उन्होंने ऐसा कर 40.36 लाख रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित की। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
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उन्होंने बताया कि कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे स्क्वाड्रन लीडर पोलू श्रीधर को अदालत ने कोई राहत नहीं दी और उन्हें ऐसी संपत्ति अर्जित करने का दोषी ठहराया जिसका संतोषजनक हिसाब नहीं दिया जा सका। उन्होंने बताया कि विशेष अदालत अगले साल दो जनवरी से सजा पर दलीलें सुनना शुरू करेगी।
सीबीआई ने अपनी प्राथमिकी में आरोप लगाया था कि एक जनवरी 2007 से 31 दिसंबर 2010 के बीच एक्सिस बैंक में उनके तीन खातों में 11.9 करोड़ रुपये जमा किए गए। यह पैसा कथित तौर पर कांग्रेस के पूर्व सांसद बालाशोवरी वल्लभनेनी का था और इसे 12.5 करोड़ रुपये के भूमि सौदे के लिए खर्च किया जाना था।
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सीबीआई ने 27 सितंबर, 2016 को श्रीधर, बालाशोवरी और बैंक मैनेजर मनीष सक्सेना के खिलाफ मामला दर्ज किया था। एजेंसी ने छह साल बाद 24 नवंबर, 2022 को श्रीधर के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया क्योंकि उसे वल्लभनेनी और सक्सेना के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले।
एजेंसी ने अपने आरोपपत्र में अवैध संपत्ति की मात्रा 11.9 करोड़ रुपये से घटाकर 40 लाख रुपये कर दी क्योंकि उसने पाया कि पूर्व सांसद ने श्रीधर के खातों का इस्तेमाल करते हुए अपने पैसे से जमीन खरीदी थी।
सुनवाई के दौरान श्रीधर ने दावा किया कि सीबीआई ने शेयर ट्रेडिंग, म्यूचुअल फंड और भूमि सौदों से अर्जित कमीशन से उनकी कमाई पर विचार नहीं किया। शेष न्यायाधीश अश्विनी कुमार ने कहा कि श्रीधर यह नहीं दिखा सके कि धन शेयर कारोबार या भूमि सौदों के माध्यम से अर्जित किया गया था, जैसा कि उन्होंने दावा किया था, साथ ही उन्होंने अपने कार्यालय या आयकर विभाग को बेहिसाब धन के बारे में सूचित नहीं किया था। न्यायाधीश ने कहा कि अभियोजन पक्ष संदेह से परे यह साबित करने में सक्षम था कि श्रीधर ने 40 लाख रुपये की बेहिसाब कमाई की थी।