महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के तहत मजदूरी में बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, वृद्धि की कम दर को लेकर सरकार आलोचकों के निशाने पर है। इसी बीच सूत्रों ने बताया है कि कृषि श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के आधार पर मजदूरी बढ़ाने का फैसला लिया गया है। सरकार के मुताबिक पिछले साल की तुलना में मजदूरी 7.7 फीसदी बढ़ी है।
बता दें कि ग्रामीण विकास मंत्रालय ने बुधवार को मजदूरी की नई दरों की अधिसूचना जारी की थी। इसमें विभिन्न राज्यों की मजदूरी दरों को चार से 10 प्रतिशत के बीच बढ़ाया गया है। आलोचना के बीच मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि केंद्र सरकार ने मुद्रास्फीति को देखते हुए मनरेगा के तहत काम करने वाले श्रमिकों को उचित मजदूरी देने का प्रयास किया है।
सूत्रों ने बताया कि सीपीआई-एएल पर प्रासंगिक डेटा श्रम ब्यूरो, शिमला से लिया गया है। मनरेगा कानून, 2005 की धारा 6 (1) के तहत आंकड़ों में संशोधन करने के बाद मनरेगा वेतन वृद्धि की अधिसूचना जारी की गई।
गणना करने के फॉर्मूले के बारे में ग्रामीण विकास मंत्रालय के एक सूत्र ने बताया कि सीपीआई-एएल में कुल वृद्धि 1167 से 1257 पहुंची है। यानी कुल वृद्धि 7.7 प्रतिशत है। यह सूचकांक अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग होता है। सूत्र ने बताया कि श्रम ब्यूरो, शिमला स्वतंत्र अभ्यास करता है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में मुद्रास्फीति की झलक दिखाता है।
गुजरात में सूचकांक 9.2 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में 10 प्रतिशत और आंध्र प्रदेश में 10.2 प्रतिशत बढ़ा है। इन राज्यों में यह राष्ट्रीय औसत से भी अधिक है। यूपी में यह केवल 3.2 प्रतिशत, राजस्थान में 4.4 प्रतिशत और हरियाणा में 4.7 प्रतिशत बढ़त दर्ज की गई है। इनका प्रतिशत राष्ट्रीय औसत से भी नीचे है।
पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने मनरेगा श्रमिकों की मजदूरी में कम बढ़ोतरी पर चिंता जाहिर की। इस पर सूत्र ने कहा कि राज्य के लिए 5.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी कई है जो अन्य की तुलना में अधिक है।
शिवसेना यूबीटी के नेता से प्रवर्तन निदेशालय आठ अप्रैल को पूछताछ करेगा
शुक्रवार की एक अन्य अहम घटना प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की तरफ से सामने आई। ईडी ने महाराष्ट्र के मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) नेता और लोकसभा चुनाव के उम्मीदवार अमोल कीर्तिकर को कोविड खिचड़ी घोटाला मामले में तलब किया है। उन्हें 8 अप्रैल को पूछताछ के लिए बुलाया।
जी एंटरटेनमेंट ने 50% कर्मचारियों को निकाला
जी एंटरटेनमेंट ने अपने बंगलूरू स्थित प्रौद्योगिकी व नवोन्मेषण केंद्र (टीआईसी) में करीब 50 फीसदी कर्मचारियों की छंटनी की है। एक विशेष समिति के सुझाव के बाद यह कदम उठाया गया है। कंपनी ने शुक्रवार को कहा कि प्रबंध निदेशक एवं सीईओ ने लागत दक्ष ढांचा बनाने के लिए टीआईसी के 50 फीसदी कर्मचारियों की छंटनी की है।
जेम के जरिये खरीद रिकॉर्ड चार लाख करोड़ के पार
सरकारी ई-मार्केट (जेम) पोर्टल के जरिये वस्तुओं-सेवाओं की खरीद चालू वित्त वर्ष में 28 मार्च तक दोगुना बढ़कर चार लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गई। विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की ओर से अधिक खरीद गतिविधियों से जेम ने यह उपलब्धि हासिल की है। 2022-23 में पोर्टल के जरिये दो लाख करोड़ से अधिक और 2021-22 में 1.06 लाख करोड़ की खरीदारी हुई थी। जेम के सीईओ पीके सिंह ने शुक्रवार को बताया, इस ऐतिहासिक खरीद में सेवाओं की हिस्सेदारी 2.05 लाख करोड़ रुपये रही, जो 2022-23 में 66,000 करोड़ थी। इस दौरान 1.95 लाख करोड़ रुपये की वस्तुओं की खरीद हुई।
जयश्री दास फिक्की महिला संगठन अध्यक्ष
नई दिल्ली। जयश्री दास वर्मा ने फिक्की महिला संगठन के 41वें राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में पद संभाल लिया है। वर्मा को इस्राइल ने पूर्वोत्तर भारत के लिए अपना मानद वाणिज्यदूत नियुक्त किया है। वह मानव संसाधन फर्म काप्रो मैनेजमेंट सॉल्यूशंस प्राइवेट लि. की निदेशक भी हैं।
गिफ्ट सिटी के लिए डिलीवरी सेवा 20 घंटे में
ब्लू डार्ट ने प्रमुख महानगरों से गुजरात स्थित गिफ्ट सिटी के लिए 20 घंटे की डिलीवरी सेवा शुरू की है। कंपनी के एमडी बफलर मैनुअल ने कहा, हम ग्राहकों की मांग को देखते हुए इस श्रेणी में सर्वोत्तम सेवाएं प्रदान करना चाहते हैं।
लैपटॉप, टैबलेट पर भारत के आयात प्रतिबंधों पर अमेरिका ने जताई चिंता
भारत की ओर से कुछ आईटी उत्पादों के आयात प्रतिबंधों को लेकर अमेरिका ने चिंता जाहिर की है। विदेश व्यापार बाधाओं पर अमेरिका ने शुक्रवार को राष्ट्रीय व्यापार अनुमान रिपोर्ट 2024 जारी की है। रिपोर्ट में अमेरिका ने कहा है कि उसने लैपटॉप और टैबलेट समेत सूचना और संचार प्रौद्योगिकी उत्पादों के आयात व्यवस्था के संबंध में भारत के साथ चिंता जाहिर की है। वर्तमान में भारत में कुछ आईटी हार्डवेयर को आयात करने के लिए प्राधिकरण से मंजूरी लेनी होती है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि भारत की ओर से आईटी उत्पादों की प्राधिकरणों से मंजूरी लेने की प्रक्रिया अपारदर्शी है। इसने अमेरिकी निर्यातकों की बाजार तक पहुंच को प्रभावित किया है।