बॉम्बे हाईकोर्ट ने 15 साल की एक किशोरी के साथ गैंगरेप मामले के आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। यह मामला वर्ष 2020 का है। अदालत ने आरोपी की याचिका खारिज करते हुए कहा कि गंभीर और जघन्य अपराधों के मामले में ट्रायल में देरी जमानत का आधार नहीं बन सकती।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि गायकवाड़ सामूहिक बलात्कार के आरोप का सामना रहा है है, जो एक गंभीर मामला है इसके लिए आरोपी को आजीवन कारावास की न्यूनतम सजा हो सकती है। अदालत ने कहा, 'यह बहुत गंभीर मामला है जहां आरोप है कि आरोपी (गायकवाड़) सामूहिक बलात्कार के अपराध में शामिल है। जब घटना हुई, तब पीड़िता की उम्र महज 15 साल थी। इसलिए लंबी कैद के आधार पर भी जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता है।'
इससे पहले अदालत ने उस समय भी हैरानी जताई थी जब पीड़िता और उसके पिता ने अदालत के समक्ष पेश होकर कहा था कि अगर आरोपी को जमानत दी जाती है तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। न्यायमूर्ति जामदार ने कहा कि जमानत याचिका खारिज करने का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू पीड़िता और उसके पिता का आचरण है, जिससे संदेह होता है कि आरोपी व्यक्ति मामले में गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। पीठ ने निचली अदालत को निर्देश दिया कि वह नौ महीने के भीतर मुकदमे को तेजी से पूरा करे और हर तीन महीने में समय-समय पर रिपोर्ट दाखिल करे।
अदालत ने कहा, "यह निर्देश इसलिए जारी किया जाता है क्योंकि मामला सामूहिक बलात्कार का है और आरोपी पीड़िता और गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है और सबूतों से छेड़छाड़ भी कर रहा है।"