रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने भारत को सावधान करते हुए कहा है कि देश में 78 हजार अतिरिक्त पेट्रोल पंप खोलने की योजना आर्थिक रूप से सही नहीं है। इससे ये पेट्रोल पंप एक-दूसरे की बिक्री में कटौती करेंगे और उनका मुनाफा कम हो जाएगा।
सार्वजनिक क्षेत्र की तीन पेट्रोलियम कंपनियों इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल) ने पिछले साल नवंबर में देश में 78,493 और पेट्रोल पंप खोलने का विज्ञापन निकाला था।
इस पर क्रिसिल ने कहा है कि प्रस्तावित संख्या के मुकाबले करीब आधे यानी 30,000 और पेट्रोल पंप खोलने की ही गुंजाइश बनती है। ऐसा होता है तो ये पेट्रोल पंप 12 साल से अधिक की अवधि के बाद लाभ कमाने की स्थिति में पहुंच पाएंगे और डीलर का रिटर्न 12 से 15 प्रतिशत पर स्थिर रह सकेगा। अगर प्रस्ताव का 50 प्रतिशत पेट्रोल पंप खोला जाता है तो और कुछ साल तक बिक्री की उम्मीद कम रहेगी और मुनाफे तक आने में समय लग सकता है।
निजी कंपनियां भी दौड़ में
देश में अभी 64,624 पेट्रोल पंप परिचालन में हैं। निजी क्षेत्र की कंपनियां भी पेट्रोल पंपों की संख्या बढ़ाने की तैयारी में हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज और बीपी पीएलसी का संयुक्त उद्यम और नायरा एनर्जी लिमिटेड अगले तीन साल में कुल 4 हजार पेट्रोल पंप खोलेंगे। रॉयल डच शेल भी इस अवधि में 150 से 200 पेट्रोल पंप खोलने की तैयारी में है। वित्त वर्ष 2029-30 तक निजी क्षेत्र की कंपनियां 7,500 से 8,000 पेट्रोल पंप जोड़ सकती हैं।