मुंबई की एक अदालत ने भाजपा नेता समेत कई अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले को बंद करने की सीबीआई की रिपोर्ट खारिज कर दी है। आरोपियों पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के 103 करोड़ रुपये की गड़बड़ी का आरोप है।
अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट जयवंत यादव ने 23 अक्टूबर के अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया सभी आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला पूरी तरह से स्थापित होता है। आदेश की प्रति शनिवार को उपलब्ध कराई गई।
अदालत ने कहा "मैं मानता हूं कि प्रथम दृष्टया भारतीय दंड संहिता की धारा 120 (बी), 417, 420, 467, 468 और 471 (साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी) के तहत दंडनीय अपराध किए गए प्रतीत होते हैं, लेकिन की गई जांच पर्याप्त नहीं है। यह अधूरा है।"
अदालत ने कहा, 'आरोपी के आपराधिक कृत्य से निपटने की जरूरत है क्योंकि फर्जी दस्तावेज बनाकर और एक राष्ट्रीयकृत बैंक (सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया) को करोड़ों रुपये का चूना लगाकर सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया गया है।' अदालत ने कहा कि सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज किया जा सकता है और आगे की जांच करने और उचित रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया जा सकता है।
जांच एजेंसी के अनुसार, टेनेट एक्जिम प्राइवेट लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक मोहित कंबोज और कई अन्य लोगों ने कथित तौर पर क्रेडिट सुविधा का लाभ उठाने के लिए झूठे दस्तावेज जमा करके सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के साथ 103 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की। सीबीआई ने मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष एक क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें कहा गया है कि उसकी जांच में किसी भी गलत बयानी का पता नहीं चला है।
एजेंसी ने मामले को बंद करने की मांग की, क्योंकि कंपनी और उसके निदेशकों पर मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूतों की कमी थी।अदालत ने अपने आदेश में गवाहों के बयानों का हवाला दिया और कहा कि यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि आरोपी ने सामान की झूठी बिक्री/खरीद के जाली दस्तावेज तैयार किए और उन्हें बैंक को सौंप दिया और प्रथम दृष्टया, यह माना जा सकता है कि आरोपी व्यक्तियों ने बैंक से ऋण प्राप्त करने के लिए दस्तावेजों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया।