देश में कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़कर 170 हो गई है। इसका प्रभाव अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। शेयर बाजार में भी लगातार गिरावट आ रही है। इसलिए केंद्र सरकार कोरोनो के प्रभाव को कम करने के लिए लोन और टैक्स से जुड़े कुछ नियमों में बदलाव कर सकती है।
वित्त मंत्रालय लोन की अवधि बढ़ाने और छोटी कारोबारियों के लिए कर्ज मानदंड में ढील देने पर विचार कर रहा है। अमेरिका, चीन और इंडोनेशिया सहित कई देशों ने अर्थव्यवस्था पर कोरोना के असर को कम करने के लिए अरबों रुपये खर्च करने की घोषणा की है।
लाइवमिंट की खबर के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार दबाव में है क्योंकि 2.7 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था को वायरस के प्रकोप के प्रभाव से बचाने के लिए कदम उठाने की जरूरत है। भारतीय अर्थव्यवस्था एक दशक से अधिक समय से कमजोर गति से विकास कर रही है।
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण ने सेहत के साथ-साथ जिस तरह अर्थव्यवस्था के लिए भी गंभीर संकट पैदा कर दिया है, वह एक तरह से दोहरी मुसीबत है। भारत में सूक्ष्म, छोटे और मध्यम बिजनेस (MSME) से 1,000 लाख से भी ज्यादा लोग जुड़े हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, एमएसएमई का मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन में कुल 45 फीसदी हिस्सा है और देश के निर्यात में इसकी 40 फीसदी हिस्सेदारी है। विश्वभर में छोटे कारोबारियों और सभी सेक्टर्स को कोरोना से बचाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
कोरोना वायरस के डर को दूर करने को जरूरी कदम उठाएंगे सरकार व RBI
मालूम हो कि मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम ने कहा था कि कोरोना वायरस की वजह से बाजार में बैठ रहे ‘डर’ से निपटने के लिए सरकार और रिजर्व बैंक सभी अनिवार्य कदम उठाएंगे। सुब्रमण्यम ने कहा कि भारतीय शेयर बाजारों की गिरावट दुनिया के अन्य बाजारों की तुलना में काफी कम है। अगले कुछ सप्ताह में घरेलू बाजार में स्थिरता देखने को मिलेगी क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी संकेत मजबूत बने हुए हैं। मुद्रास्फीति घट रही है, औद्योगिक उत्पादन बढ़ा है और देश के पास पर्याप्त मात्रा में विदेशी मुद्रा भंडार है।