मनी लॉन्ड्रिंग तेजी से बढ़ती भारतीय डिजिटल अर्थव्यवस्था और ऑनलाइन गेमिंग क्षेत्र के लिए बड़ा खतरा है। देश की मजबूत डिजिटल अर्थव्यवस्था की रक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। डिजिटल इंडिया फाउंडेशन की रिपोर्ट में कहा गया है कि अवैध परिचालकों से निपटने के लिए एक कार्यबल बनाने, वैध संचालकों की श्वेत सूची बनाने, भ्रामक विज्ञापनों से निपटने के साथ वित्तीय अखंडता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के सिद्धांतों पर जोर देने की जरूरत है। इसके अलावा, अन्य महत्वपूर्ण उपायों में जन जागरूकता और शिक्षा प्रदान करना शामिल है, ताकि उपयोगकर्ता सतर्क निर्णय ले सकें। भ्रामक व्यवहार में शामिल ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म से बच सकें।
कड़ी निगरानी व प्रवर्तन की तत्काल आवश्यकता
डिजिटल इंडिया फाउंडेशन के सह- संस्थापक अरविंद गुप्ता ने कहा, अवैध परिचालकों पर अंकुश लगाने के नियामकीय प्रयासों के बावजूद कई मंच मिरर साइट्स, अवैध ब्रांडिंग और असंगत वादों के जरिये प्रतिबंधों को दरकिनार कर देते हैं। यह स्थिति कड़ी निगरानी और प्रवर्तन की तत्काल आवश्यकता पर जोर देती है। इसके अलावा, प्रवर्तन तंत्र की कमी के कारण कुख्यात अपराधियों के खिलाफ छिटपुट कार्रवाई हो रही है।
- भारतीय रियल मनी गेमिंग (आरएमजी) क्षेत्र 2019-20 से 2022-23 तक 28 फीसदी की सालाना वृद्धि के साथ वैश्विक बाजार में अग्रणी बन गया है।
गेमिंग क्षेत्र 2025 तक देगा 2.50 लाख रोजगार
गुप्ता ने कहा, देश के ऑनलाइन गेमिंग क्षेत्र में 400 से अधिक घरेलू स्टार्टअप हैं। प्रतिदिन ऑनलाइन गेम खेलने वालों की संख्या 10 करोड़ है, जिनमें 9 करोड़ लोग खेलने के लिए भुगतान करते हैं। यह क्षेत्र प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब एक लाख रोजगार देता है। इसमें 2025 तक 2.50 लाख नौकरियां पैदा करने की क्षमता है।