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Cabinet: उज्ज्वला लाभार्थियों को एलपीजी सिलेंडर पर राहत, अब 200 रुपये की जगह 300 रुपये सब्सिडी देने का एलान

Wed, 04 Oct 2023 05:47 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Cabinet: भारत सरकार ने राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड की स्थापना को अधिसूचित किया है। यह बोर्ड हल्दी के बारे में जागरूकता और खपत बढ़ाने में मदद करेगा और निर्यात बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए बाजार विकसित करेगा।
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कैबिनेट का फैसला - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए सब्सिडी राशि 200 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये प्रति एलपीजी सिलेंडर कर दी है। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर कैबिनेट के फैसलों पर एक ब्रीफिंग के दौरान यह जानकारी दी। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई। रक्षा बंधन के मौके पर गैस सिलेंडर के दामों में 200 रुपए की कटौती की गई थी...आज से उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों की सब्सिडी 200 रुपए से बढ़ाकर 300 की जा रही है।"

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 तीन केंद्र शासित प्रदेशों के लिए किरायेदारी नियमन को मंजूरी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केंद्र शासित प्रदेशों अंडमान व निकोबार, दादरा-नगर हवेली और दमन-दीव के लिए किरायेदारी नियमन को मंजूरी दे दी है ताकि परिसरों को किराए पर देने के लिए जवाबदेह और पारदर्शी पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के वास्ते ''कानूनी ढांचा'' मुहैया कराया जा सके।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में संविधान के अनुच्छेद 240 के तहत अंडमान और निकोबार द्वीप समूह किरायेदारी विनियमन, 2023, दादरा और नगर हवेली व दमन और दीव किरायेदारी विनियमन, 2023 और लक्षद्वीप किरायेदारी विनियमन, 2023 की घोषणा के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।  

अनुच्छेद 240 राष्ट्रपति को केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नियम बनाने का अधिकार देता है। बयान में कहा गया है कि ये नियम मकान मालिक और किरायेदार दोनों के हितों और अधिकारों को संतुलित करके केंद्र शासित प्रदेशों में परिसर किराए पर लेने के लिए एक जवाबदेह और पारदर्शी पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करेंगे।
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बयान में कहा गया है, "नियमों से किराये के बाजार में निजी निवेश और उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा, प्रवासियों, औपचारिक और अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों, पेशेवरों, छात्रों आदि सहित समाज के विभिन्न आय वर्गों के लिए पर्याप्त किराये के आवास का निर्माण होगा।"

केंद्र बनाएगा राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड, 2030 तक एक अरब डॉलर निर्यात का लक्ष्य
केंद्र सरकार औषधीय महत्व वाली जड़ी-बूटियों के उत्पादन को बढ़ावा देने और 2030 तक इसके निर्यात को 1 अरब अमेरिकी डॉलर या 8,400 करोड़ रुपये तक बढ़ाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड की स्थापना करेगी। मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने के साथ ही सरकार ने बुधवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी। बोर्ड देश में हल्दी और उसके उत्पादों के विकास पर ध्यान देगा। केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी ने बताया कि इस फैसले से तेलंगाना के किसानों की लंबे समय से लंबित मांग भी पूरी होगी। उन्होंने कहा, बोर्ड न सिर्फ तेलंगाना बल्कि महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, मिजोरम, असम, गुजरात, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के किसानों की भी मदद करेगा। हल्दी के विश्व व्यापार में भारत की हिस्सेदारी 62 प्रतिशत से अधिक है। 2022-23 के दौरान, 380 से अधिक निर्यातकों ने 207.45 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के 1.534 लाख टन हल्दी और उसके उत्पादों का निर्यात किया था।

 कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण के संदर्भ की शर्तों को भी मंजूरी
मंत्रिमंडल ने कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण के संदर्भ की शर्तों को भी मंजूरी दे दी। यह आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच नदी जल के विभाजन को नियंत्रित करेगा। ठाकुर ने बताया कि कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण नई संदर्भ शर्तें प्रदान करेगा जिसके तहत न्यायाधिकरण भविष्य में कृष्णा नदी के पानी को दोनों राज्यों, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच विभाजित करेगा। दोनों राज्यों में उन परियोजनाओं के लिए परियोजना-वार आधार पर पानी आवंटित करेगा जो विकासात्मक या भविष्य के उद्देश्यों के लिए हैं।

 केंद्र ने संशोधित लागत पर उत्तरी कोयल जलाशय परियोजना का बचा काम पूरा करने की दी मंजूरी
मंत्रिमंडल ने 2,430 करोड़ रुपये की संशोधित लागत पर अंतर-राज्य उत्तरी कोयल जलाशय परियोजना के शेष कार्यों को पूरा करने की मंजूरी भी दे दी। शेष कार्य पूरा होने पर, परियोजना झारखंड और बिहार के चार सूखाग्रस्त जिलों में 42,301 हेक्टेयर को अतिरिक्त वार्षिक सिंचाई प्रदान करेगी। यह परियोजना लंबे समय से लंबित है, और नहरों की लाइनिंग जैसे अतिरिक्त घटकों समेत इस परियोजना के पूरा होने से पीने के लिए और अतिरिक्त सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होगा। इससे पहले अगस्त 2017 में इस काम के लिए 1622.27 करोड़ रुपये मंजूर हुए थे। बढ़ी हुई 457.81 करोड़ रुपये की लागत केंद्र सरकार वहन करेगी।  

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