मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत के साथ टैक्स विवाद में फ्रांस के कोर्ट ने ब्रिटेन की केयर्न एनर्जी के पक्ष में फैसला दिया है। सूत्रों ने गुरुवार को यह जानकारी दी कि ब्रिटेन की केयर्न एनर्जी ने मध्यस्थता आदेश के तहत 1.7 अरब अमेरिकी डॉलर का हर्जाना वसूलने के लिए एक फ्रांसीसी अदालत से फ्रांस में स्थित 20 भारतीय सरकारी संपत्तियों को जब्त करने का आदेश हासिल किया है। लेकिन इस संदर्भ में वित्त मंत्रालय ने कहा कि भारत सरकार को इस संबंध में किसी भी फ्रांसीसी न्यायालय से कोई भी नोटिस या आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। सरकार ने इस खबर का खंडन किया है।
केयर्न के प्रतिनिधियों ने चर्चा के लिए भारत सरकार से किया संपर्क
दिसंबर 2020 के अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता पुरस्कार को रद्द करने के लिए सरकार पहले ही हेग कोर्ट ऑफ अपील में 22 मार्च 2021 को एक आवेदन दायर कर चुकी है। वित्त मंत्रालय ने कहा कि सरकार तथ्यों का पता लगाने की कोशिश कर रही है, और जब भी ऐसा कोई आदेश प्राप्त होगा, भारत के हितों की रक्षा के लिए अपने वकीलों के परामर्श से उचित कानूनी उपाय किए जाएंगे। साथ ही मंत्रालय ने यह भी कहा कि केयर्न के सीईओ और प्रतिनिधियों ने मामले को सुलझाने के लिए चर्चा के लिए भारत सरकार से संपर्क किया है। चर्चा हुई है और सरकार देश के कानूनी ढांचे के भीतर विवाद के समाधान के लिए तैयार है।
हालांकि खबरों में कहा जा रहा है कि फ्रांसीसी अदालत ने 11 जून को केयर्न एनर्जी को भारत सरकार की संपत्तियों के अधिग्रहण का आदेश दिया था, जिनमें ज्यादातर फ्लैट शामिल हैं, और इस बारे में कानूनी प्रक्रिया बुधवार शाम को पूरी हो गई। एक मध्यस्थता अदालत ने दिसंबर में भारत सरकार को आदेश दिया था कि वह केयर्न एनर्जी को 1.2 अरब डॉलर से अधिक का ब्याज और जुर्माना चुकाए।
केयर्न एनर्जी ने की थी विदेशों में कई न्यायालयों में अपील
हालांकि भारत सरकार ने इस आदेश को स्वीकार नहीं किया, जिसके बाद केयर्न एनर्जी ने भारत सरकार की संपत्ति को जब्त करके देय राशि की वसूली के लिए विदेशों में कई न्यायालयों में अपील की।