एनडीए सरकार का पहला बजट पेश होने से पहले कांग्रेस पार्टी ने 'किसान' दांव चल दिया है। सांसद और पार्टी नेता जयराम रमेश ने सोमवार को अपने एक बयान में कहा, केंद्र सरकार की तमाम विफलताओं में से कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय की क्षमताहीनता व दुर्भावना से भरा व्यवहार सबसे अधिक हानिकारक है। यूपीए सरकार ने गेहूं की एमएसपी 119 फीसदी और धान की एमएसपी में 134 फीसदी बढ़ाई थी, वहीं मोदी सरकार ने इसे क्रमशः 47 फीसदी और 50 फीसदी बढ़ाया है। यह महंगाई और कृषि इनपुट की बढ़ती कीमतों के हिसाब से बिलकुल भी लिए पर्याप्त नहीं है। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप C2+50% फॉर्मूले के तहत, एमएसपी के अंतर्गत आने वाली 22 फसलों के लिए एमएसपी बढ़ाया जाए। इस साल आरबीआई से रिकॉर्ड 2.11 लाख करोड़ का लाभांश मिलने के बावजूद, किसानों के एक रुपये का कृषि ऋण भी माफ नहीं किया गया है।
जयराम रमेश ने कहा, गेहूं और धान की एमएसपी में मौजूदा वृद्धि, महंगाई और कृषि इनपुट की बढ़ती कीमतों के हिसाब से बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं है। किसानों का कर्ज बहुत बढ़ गया है। एनएसएसओ के अनुसार, 2013 के बाद से बकाया ऋण में 58 फीसदी की वृद्धि हुई है। आधे से ज्यादा किसान कर्ज में डूबे हैं। 2014 के बाद से हमने 1 लाख से अधिक किसानों को आत्महत्या से मरते देखा है। कांग्रेस नेता ने आगामी बजट में कृषि कल्याण के लिए केंद्र सरकार की तरफ से तीन मुख्य घोषणा किए जाने की आवश्यकता है।
स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप C2+50% के फॉर्मूले के अनुरूप, 22 फसलों के लिए एमएसपी बढ़ाएं। सरकार की अपनी मान्यता कि एमएसपी को कानूनी दर्जा देकर लागू करने के लिए सभी कृषि उत्पादों की खरीद की आवश्यकता नहीं है, के विपरीत एमएसपी को कानूनी दर्जा दें। इसे मजबूती से लागू करने के लिए एक प्रणाली स्थापित करें, जिसमें रणनीतिक खरीद, बेहतर विनियमन और मूल्य अंतर मुआवजा शामिल है। इसके लिए बस नियत और साहस की आवश्यकता है।
किसान कर्ज माफी की आवश्यकता का आकलन करने, परिमाण का आकलन करने, और कृषि ऋण माफी के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए एक स्थायी आयोग की स्थापना की जाए। इस अत्यंत आवश्यक कदम से कर्ज में डूबे किसानों को राहत मिलेगी। याद रखें कि केंद्र सरकार के पास इन तीनों कदमों को उठाने के लिए पूरी शक्ति है। सिर्फ इस बात का इंतजार है कि स्वयंभू नॉन-बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री थोड़ी हिम्मत दिखाएं और अपनी जिद को छोड़कर किसानों के हित में फैसला लें।
नवंबर 2021 में, तीन काले कृषि कानूनों को वापस लेने के बाद, स्वयंभू नॉन-बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री ने एमएसपी से संबंधित मामलों की समीक्षा के लिए एक समिति के गठन की घोषणा की थी। सरकार को समिति गठित करने में आठ महीने लगे। दो साल बाद भी, उसने अभी तक कोई अंतरिम रिपोर्ट जारी नहीं की गई है। अगर सरकार चाहती तो अब तक रिपोर्ट जारी हो जाती। इससे एमएसपी को कानूनी दर्जा मिल जाता। तेलंगाना की कांग्रेस सरकार ने राज्य में कर्ज लिए हुए किसानों के लिए कृषि ऋण को माफ करना शुरू कर दिया है। इससे कुल 40 लाख किसानों को 2 लाख रुपये तक के लोन पर राहत मिलेगी।
2008 में डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए ने 72,000 करोड़ रुपये का कृषि ऋण माफ किया था। इससे बड़ी संख्या में किसानों को लाभ हुआ था। लाभार्थियों में यूपी के 54 लाख किसान, महाराष्ट्र के 42 लाख किसान, हरियाणा के 8.9 लाख किसान, बिहार के 17.6 लाख किसान और झारखंड के 6.66 लाख किसान शामिल थे। नॉन-बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री की सरकार ने पूंजीपतियों के 16 लाख करोड़ रुपए के बैंक ऋण माफ किए हैं। दूसरी तरफ, इस साल आरबीआई से रिकॉर्ड 2.11 लाख करोड़ का लाभांश मिलने के बावजूद इसने किसानों के एक रुपए का कृषि ऋण भी माफ नहीं किया है। 4 जून को मिली निर्णायक व्यक्तिगत, राजनीतिक और नैतिक हार के घावों से अभी भी उबर रहे स्वयंभू नॉन-बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री क्या कृषि कल्याण के लिए ये महत्वपूर्ण कदम उठायेंगे?