23 जुलाई को बजट आने वाला है। बजट केवल सस्ता-महंगा नहीं बताता। बजट केवल इनकम टैक्स में छूट नहीं बताता। बजट केवल विभिन्न मदों में होने वाला खर्च का बहीखाता नहीं है। बजट इस देश की तस्वीर बताता है। बताता है कि हमारी अर्थव्यवस्था की स्थिति क्या है। हम क्या करेंगे जो तरक्की हो, बजट करोड़ों भारतीयों के सपनों से रंगा होता है। सपना चाहे नौकरी का हो या फिर रोजगार का। सपना चाहे बिजनेस का हो या फिर इंफ्रास्ट्रक्टर का। सपना हर हाथ में काम का, सपना हर पेट में रोटी का, सपना देश की तरक्की का। बजट से पहले आज हम आपको कुछ खबरें बताने वाले हैं। ऐसी खबरें जिनको जानना और समझना आपके लिए बेहद जरूरी है।
चलिए इन भारीभरकम आंकडों को छोड़िए। IMF हो या RBI सभी की रिपोर्ट बताती हैं कि देश तेजी से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। तरक्की कर रहा है. लेकिन इसी रिपोर्ट में जब आप चीन के आंकडों पर नजर डालते हैं तो पता चलता है कि चीन ने साल 2023 में 5.2 फीसदी की वृद्धि दर हासिल की थी। साल 2024 में ये 5 फीसदी और 2025 में 4.5 फीसदी रह सकती है। चीन के इस डेटा को याद रखिएगा क्योंकि आगे की खबर में हम इस पर फिर से बात करेंगे।
अब एक और रिपोर्ट की बात करते हैं। ये रिपोर्ट है फाडा की। ये रिपोर्ट बताती है कि अप्रैल-जून तिमाही में सालाना आधार पर देश में वाहनों की रिटेल बिक्री 9 फीसदी बढ़ गई। इसके अलावा यात्री वाहनों की बिक्री भी 2.53 फीसदी बढ़ गई. और तो और दोपहिया वाहनों की रिटेल बिक्री भी 12.56 फीसदी बढ़ गई। इससे पता चलता है कि आम आदमी अब वाहन खरीदने में पहले से अधिक सक्षम हुआ है। दोपहिया वाहनों की बिक्री के आंकडे गवाही देते हैं कि ग्रामीण इलाकों में भी मांग बढ़ती दिख रही है।
अब दो छोटी छोटी खबरें और। पहली खबर ये कि पाकिस्तान में पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल के दाम बेतहाशा बढ़ गए हैं। IMF की शर्तों को मानना पाकिस्तान के लिए मजबूरी बन गया है क्योकि खस्ताहाल पाकिस्तान पर भारी भरकम कर्ज है। दूसरी खबर ये कि चीन के विकास की रफ्तार पर ब्रेक लगता दिख रहा है. चीन सरकार की ही एक रिपोर्ट बताती है कि अप्रैल-जून तिमाही में देश की आर्थिक विकास दर 4.7 फीसदी से भी कम रही है। उपभोक्ता मांग में कमी और चीन सरकार की ओर से होने वाला कम खर्च इसके पीछे की वजह हैं।
CRI की एक रिपोर्ट चीन की अर्थव्यवस्था को स्थिर बताती है तो वहीं रायटर्स की रिपोर्ट चीन की अर्थव्यवस्था में आई तेज गिरावट के बारे में बताती है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन में लोग अब कम खरीद पा रहे हैं। प्रॉपर्टी बाजार की हालत खराब है और चीन जिन चीजों को विदेश से आयात करता था उसमें भी भारी गिरावट आई है क्योंकि मांग बेहद कम हो गई है। यानी लोगों के पास खरीदने के लिए पैसों की कमी आई है। 15 जुलाई को छपी इस रिपोर्ट में बताया गया है कि मांग बढ़ाने के लिए चीन की कंपनियां दामों में भारी कटौती कर रही हैं। गाड़ियों से लेकर कपड़ों तक और खाने-पीने की चीजों तक के दाम घटाए जा रहे हैं ताकि मांग बनी रह सके। अब याद करिए चीन के उस डेटा के बारे में जो हमने अपने वीडियो की शुरूआत में ही बताया था।
चलिए अब आपको बताते हैं चाइना प्लस वन के बारे में। हो सकता है आपने पहले भी इस बारे में सुना हो। दरअसल एक वक्त था जब चीन को दुनिया की फैक्टरी कहाजाता था। दुनिया के तमाम देशों को अपने कारखाने चीन में लगा दिए थे। हर चीज के लिए दुनिया मानो चीन पर निर्भर हो गई थी। लेकिन अब दुनिया ने चाइना प्लस वन के बारे में सोचना शुरु कर दिया है। इसका मतलब है चीन के अलावा एक और देश में कारखाने लगाना। ऐसा इसलिए क्योंकि महामारी के दौर में दुनिया ने देखा कि चीन पर निर्भरता उसके लिए ठीक नहीं रही। साथ ही इस मामले में चीन की मोनोपोली भी हो गई। यानी एकाधिकार हो गया।
यही वजह है कि अब दुनिया भारत, बांगलादेश, थाईलैंड, वियतनाम, और मलेशिया जैसे देशों में अपने कारखाने, अपनी फैक्टरी लगाने पर विचार कर रही है। इस मामले में भारत को बाकी देशों से ज्यादा तवज्जो भी मिल रही है और बाकी देशों से ज्यादा वजन भी। इसके पीछे वजहें भी हैं। वर्ल्ड बैंक का डेटा बताता है कि साल 2023 में भारत की 28.4 प्रतिशत जनसंख्या की उम्र 30 साल से कम है। वहीं चीन में केवल 20.4 फीसदी जनसंख्या ही 30 साल से कम वाली है।
एक वजह ये कि साल 2019 में भारत सरकार ने नेशनल इंफ्रास्ट्रक्टर पाइपलाइन नाम की एक योजना शुरू की थी। इसका काम था देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाना। साल 2020 से साल 2025 के बीच इस योजना में सरकार को 100 लाख करोड़ रुपए निवेश करने थे। ऐसा अनुमान है कि इस पर 111 लाख करोड़ का खर्चा होगा. इससे दुनिया का भरोसा भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ेगा।
भारत ने इसके अलावा PLI स्कीम को भी लॉन्च किया था। टैक्स में सुधार किए थे। विदेशी निवेश के नियमों को आसान बनाया था। मेक इन इंडिया जैसी चीजें शुरू की थीं। इन सबको देखते हुए ये माना जा रहा है कि दुनिया की बहुत सी कंपनियों और देशों ने भारत में बड़े निवेश की तैयारी शुरु कर दी हैं।
इसके अलावा भारत पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा बाजार भी है। यहां करीब 130 करोड़ लोग रहते हैं। औऱ तो और भारत में प्रति व्यक्ति आय भी बढ़ी है और जीडीपी में भी बढोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट बताती हैं कि जो कंपनियां चीन के अलावा जगहें तलाश रही हैं ऐसी 28 कंपनियों ने भारत में रुचि दिखाई है। भारत के बाद वियतनाम का नंबर है जहां 23 कंपनियों ने रुचि दिखाई है।
अब आप समझ चुके होंगे कि आने वाले बजट में इस बार सरकार का जोर दुनिया के निवेश को भारत की ओर मोड़ने पर हो सकता है। हो सकता है कि भारत इस बजट में PLI जैसी कोई स्कीम लेकर आए या फिर मेक इन इंडिया जैसी कोई स्कीम शुरू करे। यकीन मानिए कि दुनिया की सबसे अच्छी मैनपावर फिलहाल भारत के पास है और शायद ही कोई सरकार इस पर दांव खेलने से पीछे हटेगी। इस खबर को आप सेव कर लीजिए, बजट के बाद जब हम फिर से इस पर चर्चा करेंगे तो ध्यान रखिएगा कि अमर उजाला ने सबसे पहले आपको इसके बारे में बताया था।