वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज साल 2024 का अंतरिम बजट पेश करेंगी। बजट में ऐसी कई बातों और शब्दों का उल्लेख होता है, जिन्हें हम आमतौर पर सुनते हैं, समझने का अहसास भी होता है लेकिन उसकी परिभाषा और व्याख्या के बारे में हमें पता नहीं होता। आइए बजट में इस्तेमाल होने वाले ऐसे ही शब्दों के मायने सरल व आसान भाषा में समझने की कोशिया करते हैं?
क्या है बजट?
राजकोषीय घाटा
सरकार की कुल आय और व्यय में अंतर को आर्थिक शब्दावली में ‘राजकोषीय घाटा’ कहा जाता है। इससे इस बात की जानकारी होती है कि सरकार को कामकाज चलाने के लिए कितने उधार की जरूरत होगी। कुल राजस्व का हिसाब-किताब लगाने में उधार को शामिल नहीं किया जाता है। यानी, सरकार के खर्च और आमदनी के अंतर को वित्तीय घाटा या बजटीय घाटा कहा जाता है।
चालू खाता घाटा
सरकारी राजस्व व व्यय
सरकारी राजस्व सरकार को उसके सभी स्रोतों से होने वाली आमदनी होता है। इसके विपरीत सरकार जिन-जिन मदों में खर्च करती है उसे सरकारी व्यय कहते हैं। यह सरकार की वित्तीय नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।
बजट आकलन
वित्तमंत्री संसद में बजट प्रस्ताव रखते हुए विभिन्न तरह के कर और शुल्क के माध्यम से होने वाली आमदनी और योजनाओं व अन्य तरह के खर्चों का लेखा पेश करती हैं, उसे आमतौर पर बजट आकलन कहा जाता है।
वित्त विधेयक
इस विधेयक के माध्यम से ही आम बजट पेश करते हुए वित्तमंत्री सरकारी आमदनी बढ़ाने के विचार से नए करों आदि का प्रस्ताव करते हैं। इसके साथ ही वित्त विधेयक में मौजूदा कर प्रणाली में किसी तरह का संशोधन आदि को प्रस्तावित किया जाता है। संसद की मंजूरी मिलने के बाद ही इसे लागू किया जाता है।
राजस्व सरप्लस
यदि राजस्व प्राप्तियां राजस्व खर्च से अधिक हैं, तो यह अंतर राजस्व सरप्लस की श्रेणी में होगा।
विनियोग विधेयक
विनियोग विधेयक का सीधा अर्थ यह है कि तमाम तरह के उपायों के बावजूद सरकारी खर्चे पूरे करने के लिए सरकार की कमाई नाकाफी है और सरकार को इस मद के खर्चे पूरे करने के लिए संचित निधि से धन की जरूरत है। एक तरह से वित्तमंत्री इस विधेयक के माध्यम से संसद से संचित निधि से धन निकालने की अनुमति मांगते हैं।
पूंजी बजट
बजट पेश करते हुए वित्तमंत्री सरकारी आमदनी का ब्योरा पेश करते हैं, उनमें पूंजीगत आय भी शामिल होती है। यानी, इसमें सरकार द्वारा रिजर्व बैंक और विदेशी बैंक से लिए जाने वाले कर्ज, ट्रेजरी चालानों की बिक्री से होने वाली आय के साथ ही पूर्व में राज्यों को दिए गए कर्जों की वसूली से आए धन का हिसाब-किताब भी इस पूंजी बजट का हिस्सा है।
संशोधित आकलन
यह बजट में खर्चों के पूर्वानुमान और वास्तविक खर्चों के अंतर का ब्योरा है।
पूंजी भुगतान
सरकार को किसी तरह की परिसंपत्ति खरीदने के लिए जो भुगतान देना होता है, वह इस श्रेणी में आता है। केंद्र सरकार द्वारा राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और सार्वजनिक उपक्रमों को मंजूर कर्ज और अग्रिम राशि भी पूंजी खर्च के रूप में जाना जाता है।
पूंजी प्राप्तियां
रिजर्व बैंक अथवा अन्य एजेंसियों से प्राप्त कर्ज, ट्रेजरी चालान की बिक्री से होने वाली आमदनी के साथ ही राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों को दिए गए पिछले कर्जों की उगाही और सार्वजनिक उपक्रमों में अपनी हिस्सेदारी बेचने से प्राप्त धन भी इसी श्रेणी में आते हैं।
अनुदान मांग
संचित कोष से मांगे गए धन के खर्चों का अनुमानित लेखा-जोखा ही अनुदान मांग है।
योजना खर्च
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सहायता के अलावा केंद्र सरकार की योजनाओं पर होने वाले सभी तरह के खर्चों को इसमें शामिल किया जाता है।
गैर योजना खर्च
इसमें ब्याज की अदायगी, रक्षा, सब्सिडी, डाक घाटा, पुलिस, पेंशन, आर्थिक सेवाएं, सार्वजनिक उपक्रमों को दिए जाने वाले कर्ज और राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और विदेशी सरकारों को दिए जाने वाले कर्ज शामिल होते हैं।