विभिन्न सरकारी और निजी बैंकों में जमा ग्राहकों के धन की सुरक्षा का दायरा बढ़ाने के साथ बैंकों को अब इसके लिए ज्यादा राशि चुकानी होगी। सरकार ने बजट 2020 में बैंक जमा गारंटी की रकम पांच गुना बढ़ाते हुए 5 लाख रुपये कर दी है। इस फैसले से बैंकों की ओर से दिए जाने वाले बीमा प्रीमियम की राशि भी बढ़ गई है।
बैंक जमाओं पर सुरक्षा गारंटी का दायरा करीब तीन दशक बाद बढ़ाया गया है। अभी तक डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (डीआईसीजीसी) 1993 में तय किए गए अधिकतम 1 लाख रुपये की ही जमा गारंटी लेता था। बजट में प्रावधान के बाद 4 फरवरी, 2020 से इसकी सीमा बढ़ाकर प्रति ग्राहक 5 लाख रुपये कर दी गई है। यह नियम सभी बीमित बैंकों पर लागू होगा। आंकड़ों के मुताबिक, अब निजी और सरकारी क्षेत्र के बैंकों को प्रति ग्राहक 5 लाख की बीमा गारंटी के लिए सालाना 600 रुपये का प्रीमियम चुकाना होगा। ब्यूरो
20 फीसदी बढ़ा प्रीमियम का बोझ
डीआईसीजीसी की ओर से सभी बैंकों को भेजे गए संदेश में कहा गया है कि बीमा का दायरा बढ़ाने के साथ उनके प्रीमियम में भी 20 फीसदी का इजाफा किया गया है। 1 अप्रैल, 2020 से बैंकों को प्रत्येक 100 रुपये के बीमा के लिए 12 पैसे का सालाना प्रीमियम चुकाना होगा। इससे पहले बैंकों को 10 पैसे का प्रीमियम प्रति 100 रुपये के बीमा पर देना पड़ता था। बैंक प्रीमियम की यह राशि डीआईसीजीसी को चुकाते हैं, जो उनके दिवालिया होने या डूबने की स्थिति में ग्राहकों को बीमित रकम वापस लौटाने के लिए उत्तरदायी होता है।
12 पैसे प्रति 100 रुपये पर बैंकों को देना होगा प्रीमियम
डीआईसीजीसी के अनुसार, विभिन्न मदों में जमा राशि पर एक ही बीमा का लाभ मिलेगा। मसलन, किसी बैंक में बचत खाते, चालू खाते, रिकरिंग डिपॉजिट और एफडी के मद में जमा कुल राशि पर अधिकतम 5 लाख रुपये की ही सुरक्षा गारंटी मिल सकेगी।
हर बैंक का अलग बीमा
जमा बीमा की निर्धारित 5 लाख की राशि हर बैंक के लिए अलग मानी जाएगी। मसलन, अगर किसी व्यक्ति ने एक ही बैंक की विभिन्न शाखाओं में पैसे जमा किए हैं, तो उसकी कुल बीमा राशि 5 लाख रुपये होगी। लेकिन अलग-अलग बैंक में पैसे जमा हैं, तो हर बैंक में जमा धन पर 5 लाख रुपये का बीमा दिया जाएगा। लिहाजा जिन ग्राहकों के पास अधिक मात्रा में धन है, वे अलग-अलग बैंकों में पैसे जमा कराके बीमा योजना का ज्यादा से ज्यादा लाभ ले सकते हैं।