गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि राष्ट्रीय डाटाबेस सहकारिता क्षेत्र के विकास में मददगार साबित होगा। यह सहकारिता क्षेत्र के विकास को कंपास की तरह दिशा दिखाएगा। उन्होंने कहा, इससे सहकारिता क्षेत्र का विस्तार, विकास और लक्ष्यों की पूर्ति सुनिश्चित होगी। शाह शुक्रवार को सहकारी डाटाबेस पोर्टल के उद्घाटन और ‘राष्ट्रीय सहकारी डाटाबेस 2023 : एक रिपोर्ट’के विमोचन के मौके पर बोल रहे थे।
शाह ने कहा कि सहकारिता क्षेत्र के विस्तार और उसकी मजबूती के लिए 75 साल बाद पहली बार सहकारिता डाटाबेस का लोकार्पण हो रहा है। राष्ट्रीय डाटाबेस से सहकारिता की हर एक जानकारी अब एक क्लिक पर मिलेगी। देशभर में कहां सहकारी समितियां कम हैं, उस गैप की पहचान कर सहकारिता के विस्तार में राष्ट्रीय डाटाबेस मददगार साबित होगा। शाह ने कहा, हजारों लोगों की दो साल की मेहनत के बाद आज हमें ये सफलता मिली है। 60 के दशक के बाद ये जरूरत महसूस की गई कि एक राष्ट्रीय नीति के तहत हर राज्य के सहकारिता आंदोलन के बीच समन्वय हो। सहकारिता मंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में सभी प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (पीएसीएस) कंप्यूटरीकृत हो गई हैं और सभी राज्य भी कम्प्यूटरीकृत हो गए है और पैक्स मॉडल उपनियमों को स्वीकार किया है। कार्यक्रम में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सचिवों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों सहित करीब 1400 लोगों ने शिरकत की।
10 साल में गरीबी रेखा से ऊपर हुए 25 करोड़ लोग
शाह ने कहा, पीएम मोदी ने देश के ग्रामीण अर्थतंत्र और जीवन में आमूलचूल परिवर्तन लाने और पिछले 10 साल में देश के 25 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर लाने का काम किया है। करोड़ों लोगों को देश के अर्थतंत्र और विकास के साथ जोड़ने का काम सहकारिता मंत्रालय के माध्यम से हो रहा है। अर्थशास्त्री अब आश्चर्यचकित हैं। लगभग 60 करोड़ लोगों ने गैस सिलिंडर, भोजन, घर, दवाएं जैसी बुनियादी सुविधाएं हासिल कीं। उन्होंने कहा कि डाटा, विकास को सही दिशा देने का काम करता है और गैप का विश्लेषण करने में ये बहुत कारगर सिद्ध होगा।
पीएससीएस को 20 अलग-अलग गतिविधियों से जोड़ा
सहकारिता मंत्री ने कहा, प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (पीएसीएस) अब मुनाफा कमा रही हैं। हमने पीएससीएस को 20 अलग-अलग गतिविधियों से जोड़ा। आज, वे एक गरीब किसान के लिए रेलवे या एयरलाइन टिकट बुक करवा रहे हैं, वे ‘बैंक मित्र’ के रूप में काम कर रहे हैं। पीएसीएस के कम्प्यूटरीकरण ने उनके विकास का मार्ग प्रशस्त किया है।
आठ लाख से अधिक समितियां पंजीकृत, 30 करोड़ से अधिक लोग जुड़े
राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस में तीन चरणों में हुए काम का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा, पहले चरण में, तीन क्षेत्रों यानी प्राथमिक कृषि ऋण समिति, डेयरी और मत्स्यिकी की लगभग 2.64 लाख समितियों की मैपिंग पूरी की गई। दूसरे चरण में विभिन्न राष्ट्रीय संघों, राज्य संघों, राज्य सहकारी बैंक, जिला केंद्रीय सहकारी बैंक, शहरी सहकारी बैंक, राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक, प्राथमिक कृषि और ग्रामीण विकास बैंक, सहकारी चीनी मिलों, जिला यूनियनों और बहुराज्य सहकारी समितियों के आंकड़े एकत्रित/मैप किए गए। तीसरे चरण में अन्य बाकी क्षेत्रों में सभी 8 लाख प्राथमिक सहकारी समितियों के डेटा की मैपिंग की गई। देश में 8 लाख से अधिक समितियां पंजीकृत हैं और 30 करोड़ से अधिक नागरिक इनसे जुड़े हैं।
सवा सौ साल चलेगी ये मजबूत इमारत
शाह ने कहा, आज एक नींव डाली गई है और आने वाले वर्षों में इस नींव पर अगले सवा सौ साल तक चलने वाली एक मजबूत सहकारिता की इमारत खड़ी होगी। उन्होंने कहा, राष्ट्रीय डाटाबेस अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी का उपयोग कर बनाया गया एक डायनेमिक वेब आधारित प्लेटफॉर्म है और इसकी मदद से देशभर की पंजीकृत सहकारी समितियों की सारी जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा, सहकारिता डेटाबेस, नीति निर्धारकों, शोधकर्ताओं और अन्य साझेदारों के लिए अमूल्य संसाधन का काम करेगा। सहकारिता मंत्रालय सुनिश्चित करेगा कि इस डाटाबेस पर सत्यापित डाटा ही नियमित रूप से अपलोड हो। केंद्रीय मंत्री ने कहा, 1975 के बाद देश में सहकारिता आंदोलन की गति बहुत कम होती गई क्योंकि हमारे यहां भौगोलिक दृष्टिकोण से असंतुलित विकास हुआ। तमाम समस्याओं का टूल्स के साथ समाधान डाटाबेस में डाला गया है। शाह ने कहा कि आज हजारों लोगों, संघों और राज्यों ने मिलकर एक भागीरथ काम को अंजाम दिया है।
ग्रामीण समाज का होगा समग्र कल्याण
केंद्रीय मंत्री ने कहा, राज्य सरकारों, राष्ट्रीय संघों और हितधारकों के साथ सहयोग करते हुए, सहकारी-केंद्रित आर्थिक मॉडल को बढ़ावा देने के लिए एक राष्ट्रीय सहकारी डाटाबेस विकसित किया गया है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारी समितियों का विकास आर्थिक, सामाजिक और सामुदायिक चुनौतियों का समाधान करने, व्यक्तियों को सशक्त बनाने, गरीबी को कम करने और ग्रामीण समाज के समग्र कल्याण में योगदान देने का वादा करता है।