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Samvad: 'सड़कें बनने से ट्रैफिक जाम ही नहीं होता, रोजगार भी आता है', उत्तराखंड के विकास पर विशेषज्ञों की राय

Sun, 04 Aug 2024 11:57 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

Amar Ujala Samvad 2024: अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में अल्ट्रा टेक सीमेंट के मार्केटिंग हेड अजय डांग और टाटा मोटर्स में चीफ मार्केटिंग अफसर शुभ्रांशु सिंह ने देश में कारोबारी माहौल और उत्तराखंड में निवेश और ब्रांड उत्तराखंड जैसे मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।
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अमर उजाला संवाद में अल्ट्राटेक सीमेंट के मार्केटिंग हेड अजय डांग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश के विकास में कारोबार और निवेश की अहम भूमिका होती है। अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में भी कारोबार के मुद्दे पर बात करने के लिए अल्ट्रा टेक सीमेंट के मार्केटिंग हेड अजय डांग और टाटा मोटर्स में चीफ मार्केटिंग अफसर शुभ्रांशु सिंह ने 'देश के विकास की बात' विषय पर अपने विचार साझा किए। आइए जानते हैं उन्होंने क्या कहा...
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ब्रांड उत्तराखंड आपकी नजर में क्या है? 
अजय डांग:
कॉर्पोरेट और निवेश करने वालों की बात करें तो वे उत्तराखंड के बारे में कम जानते हैं। वे धार्मिक पर्यटन के बारे में ही जानते हैं। हालांकि, उत्तराखंड से लोगों का लगाव जरूर है। वे उत्तराखंड को मेहनती लोगों के राज्य के रूप में देखते हैं। तो एक तरह से निवेश के लिए यह धारणा अनुकूल है। उत्तराखंड देश के इतिहास में प्राचीनतम है, लेकिन यह राज्य नया है। धीरे-धीरे यहां विकास होगा। एक करोड़ की आबादी यहां आबादी। सारे पर्वतीय राज्यों में सबसे अच्छा प्रदर्शन उत्तराखंड का है। 

शुभ्रांशु सिंह: लोगों को उत्तराखंड के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी नहीं है क्योंकि कम लोगों का आना जाना होता है। आम तौर पर पर्यटन और नाते रिश्तेदारी के ही आना होता है। हालांकि उत्तराखंड के प्रति लोगों के मन में लगाव है। लोग मानते हैं कि उत्तराखंड के लोग मेहनती होते हैं और ईमानदार हैं और देवभूमि तो है ही। निवेश के लिहाज से भी यह अहम है। ऐसे में ब्रांड उत्तराखंड अहम है। राज्य के लिहाज से यह नया राज्य है। नए ब्रांड और नए राज्य धीरे-धीरे लोगों के जहन में अच्छे से उतरेंगे। एक करोड़ की आबादी, 35-36 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था है और सारे पहाड़ी राज्यों में उत्तराखंड सबसे अच्छा कर रहा है। उत्तराखंड निवेश के लिए आदर्श है। पहले कहा जाता था कि उद्योग अब चुनिंदा जगहों पर ही लगेंगे। आईटी के आने के बाद और कोरानाकाल के बाद यह मिथक अब टूटता दिख रहा है। 
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कुछ चीजों को लेकर उत्तराखंड की पहचान कैसे बने? 
शुभ्रांशु सिंह:
20 साल पहले राज्य की पहचान बनना शुरू हुई। पहचान बनते देर लगती है। सकारात्मक बात यह है कि उत्तराखंड को लेकर नकारात्मक पहलू ज्यादा नहीं हैं। जब लोग यहां आकर नई चीजें देखते हैं, उसका तजुर्बा लेते हैं तो नई धारणा लेकर लौटते हैं। दूसरों से सीखना अच्छी बात है, लेकिन उत्तराखंड का विकास का अपना मॉडल होना चाहिए। 

अजय डांग: यहां पूंजी निर्माण सबसे महत्वपूर्ण होगा। हमें स्थानीय उत्पाद प्रमोट करने होंगे, लेकिन इसी के साथ बाहरी निवेश आए, यह जरूरी है। यह निवेश भी निजी क्षेत्र और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का आए तो पहचान तेजी से बढ़ेगी। हथकरघा के मामले में उत्तराखंड की पहचान बन सकती है। 

क्या उत्तराखंड को हिमाचल या किसी राज्य का कोई मॉडल अपनाना चाहिए?
शुभ्रांशु सिंह:
विकास और पर्यावरण सिर्फ उत्तराखंड की दिक्कत नहीं है। जहां कहीं प्रकृति है, वहां यह चुनौती है। हम सड़कें इसलिए बनाते हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक कनेक्टिविटी रहे। खेल का मैदान, स्कूल बनने पर अगर युवाओं का फायदा होता है तो वह क्यों न बने। इसी तरह सड़क बनने से गांवों की तस्वीर बदलती है। इसे मानवीय पहलू से देखना होगा। 

अजय डांग: सड़कें पहुंचेंगी तो कारोबार पहुंचेगा। पर्यटन और गतिशीलता इससे बढ़ती है। गतिशीलता बढ़ती है तो एक रुपया 10 से 12 हाथों से गुजरता है। स्थानीय उद्यमशीलता इससे बढ़ती है। जब सब्सिडी या प्रत्यक्ष लाभार्थियों का दायरा बढ़ता है तो यह कारगर साबित होता है। 
 


पहाड़ का पानी और पहाड़ के युवा यहां के काम नहीं आते, ऐसा क्यों है? युवाओं के लिए यहां क्या संभावनााएं हैं?
शुभ्रांशु सिंह:
उद्योग आता है तो वह एक व्यक्ति के लिए नहीं होता। पूरा परिवेश मिलना जरूरी है। उद्योग लगाएंगे तो प्रतिभाशाली लोग, कच्चा माल और उनकी आपूर्ति हो सकेगी या नहीं, यह देखना होगा। देश के लिए भी यह महत्वपूर्ण है कि हर जगह परिवेश मिले। इसके लिए बुनियादी ढांचा जरूरी है। सड़कें देखकर हमें लगता है कि इससे तो ट्रैफिक जाम बढ़ेगा, लेकिन इससे रोजगार भी तो आ रहा है। 

अजय डंग: मिनिएचर उद्योग क्षेत्र होने चाहिए। हर शहर में रोजगार के अवसर बनाने होंगे। ऐसा नहीं होता तो एक शहर से दूसरे शहर और एक राज्य से दूसरे राज्य में पलायन होता रहेगा। अगर प्रतिभावान युवा यहां से जा रहे हैं तो उन्हें यहां रोके रखने के लिए योजनाएं बनानी होंगी। 

जमीन को लेकर क्या कोई कानून बनना चाहिए?
अजय डांग:
यह राज्य के लोगों को तय करना है। विकास के लिए जमीनें भी लगेंगी, प्राकृतिक संसाधन भी चाहिए होंगे। लोग मूल निवासी हो सकते हैं, लेकिन पूंजी कहीं की मूल निवासी नहीं होती। पूंजी जहां आए, वहां उसका स्वागत होना चाहिए। 

शुभ्रांशु सिंह: विकास होगा या नहीं, रोजगार बढ़ेगा या नहीं, यह देखना होगा। उत्तराखंड को आप पूरी तरह सील नहीं कर सकते। विकास के लिए जहां से भी पूंजी, तकनीक और लोग चाहिए, आपको उन्हें यहां लाना होगा।
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उत्तराखंड के पर्यटन के बारे में क्या कहेंगे? 
शुभ्रांशु सिंह:
दुनिया में पर्यटन के भीतर धार्मिक पर्यटन की हिस्सेदारी सबसे बड़ी है। उत्तराखंड में भी यह बढ़े तो इसमें कोई बुराई नहीं है। धरोहर को हम सदियों तक संजोकर रखें यह जरूरी है।
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