RBI: फेड के वार्षिक दिवस पर बोलते हुए, डिप्टी गवर्नर ने कहा कि एमएसएमई को किफायती ऋण तक पहुंच, भुगतान में देरी, बुनियादी ढांचे की अड़चनें और अनुपालन की आवश्यकताओं जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। एमएसएमई क्षेत्र के मजबूत विकास के बिना भारत के आर्थिक परिवर्तन की यात्रा पूरी नहीं हो सकती।
रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे ने वित्तीय संस्थानों से एमएसएमई (लघु व मध्यम उद्योगों) के प्रति अधिक संवेदनशील और सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने को कहा है। डिप्टी गवर्नर ने एमएसएमई के लिए ऋणों के पुनर्गठन विकल्पों जैसे सहायक उपायों को लागू करने के लिए कहा है। उन्होंने कहा है कि ऐसा करना चाहिए ताकि अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इस क्षेत्र का समर्थन किया जा सके।
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विदेशी मुद्रा डीलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FEDAI)के वार्षिक दिवस पर बोलते हुए, डिप्टी गवर्नर ने कहा कि एमएसएमई को किफायती ऋण तक पहुंच, भुगतान में देरी, बुनियादी ढांचे की अड़चनें और अनुपालन की आवश्यकताओं जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। केंद्रीय बैंक के डिप्टी गवर्नर ने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र के मजबूत विकास के बिना भारत के आर्थिक परिवर्तन की यात्रा पूरी नहीं हो सकती।
बुधवार को आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा, "एमएसएमई न केवल हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, बल्कि वे विकास, नवाचार और रोजगार के इंजन हैं।" स्वामीनाथन ने कहा, "हालांकि, इन उद्यमों को वास्तव में फलने-फूलने और आगे बढ़ने के लिए, वित्तीय क्षेत्र को नए समाधान, संवेदनशीलता और दूरदर्शी दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
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उन्होंने कहा, "यह केवल ऋण प्रदान करने के बारे में नहीं है; यह इन उद्यमों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने, निर्यात को बढ़ावा देने और 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने के देश के लक्ष्य में योगदान करने में सक्षम बनाने से जुड़ा है।"