16th Finance Commission: 16वें वित्त आयोग की बैठक से जुड़ी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि उपस्थित सदस्यों ने संदर्भ की शर्तों पर चर्चा की और राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों, भारत सरकार के मंत्रालयों और विशेषज्ञों सहित विभिन्न हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श की आवश्यकता को स्वीकार किया।
16वें वित्त आयोग के गठन के बाद इसकी पहली बैठक बुधवार को नई दिल्ली में डॉ. अरविंद पनगढ़िया की अध्यक्षता में हुई। यह बैठक राष्ट्रीय राजधानी में उन विरोध प्रदर्शनों के बीच हुई, जिसमें विशेष रूप से दक्षिणी राज्यों के लोग केंद्रीय करों के हस्तांतरण में उचित हिस्सेदारी की मांग कर रहे हैं।
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बैठक से जुड़ी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि उपस्थित सदस्यों ने संदर्भ की शर्तों पर चर्चा की और राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों, भारत सरकार के मंत्रालयों और विशेषज्ञों सहित विभिन्न हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श की आवश्यकता को स्वीकार किया।
विज्ञप्ति में कहा गया, "XVI-FC ने माना कि वह विस्तृत विश्लेषणात्मक कार्य करेगा और उसे प्रमुख अनुसंधान संगठनों, प्रमुख थिंक टैंक और राजकोषीय संघीय संबंधों के क्षेत्र में काम करने वाले अन्य संगठनों सहित सभी की विशेषज्ञता की आवश्यकता होगी।"
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16वां वित्त आयोग, जिसे संख्यात्मक रूप से XVI-FC भी कहा जाता है, अपनी सिफारिशों को 31 अक्टूबर, 2025 तक सार्वजनिक करेगा, ये सिफारिश 1 अप्रैल, 2026 से पांच वर्षों की अवधि के लिए होंगे। यह आयोग केंद्र और राज्यों के बीच शुद्ध करों के वितरण, राज्यों को आवंटित किए जाने वाले सहायता अनुदान, आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत हस्तांतरण पर सिफारिशें देगा और राज्यों में पंचायतों और नगर पालिकाओं के संसाधनों के पूरक के उपायों पर अपनी राय देगा।