सोमवार को सप्ताह के पहले कारोबारी दिन शेयर बाजार औंधे मुंह गिरा। लाल निशान पर कारोबार शुरू होने के बाद बीएसई का सेंसेक्स और एनएसई का निफ्टी दिन भर हरे निशान पर नहीं पहुंच सका। दिन चढ़ने के साथ-साथ दोनों इंडेक्सों में गिरावट बढ़ती ही गई। सेंसेक्स 1170 अंक गिरा, तो वहीं निफ्टी 348 अंक फिसलकर बंद हुआ। आज बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के कमजोर वैश्विक संकेतों और यूरोप मे कोरोना के मामले बढ़ने समेत पांच प्रमुख कारण रहे।
कमजोर वैश्विक संकेत
एशियाई शेयर बाजारों में 22 नवंबर को पूरे दिन उतार-चढ़ाव भरा रहा। इस बीच कमजोर वैश्विक संकेतों का नकारात्मक प्रभाव घरेलू शेयर बाजार पर पड़ा। इसके चलते शेयर बाजार पूरे दिन उबर नहीं पाए और अंत में भारी गिरावट के साथ बंद हुए।
विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट
आरबीआई के आंकड़ों से पता चलता है कि 12 नवंबर को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 763 मिलियन डॉलर घटकर 640.112 बिलियन डॉलर पर आ गया। बीते तीन सितंबर को समाप्त सप्ताह में इसने 642.453 अरब डॉलर के उच्चतम स्तर को छुआ। विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार में कमी का असर भी बाजार पर दिखा।
रिलायंस और सउदी अरामको मामले का असर
रिलायंस इंडस्ट्रीज और सऊदी अरामको ने 19 नवंबर को निर्धारित किया है कि यह दोनों पक्षों के लिए ओ2सी व्यवसाय में प्रस्तावित निवेश का पुनर्मूल्यांकन का फैसला लिया। अरामको को रिलायंस के ऑयल टु केमिकल बिजनेस में 20 फीसदी की हिस्सेदारी खरीदनी थी लेकिन दोनों ने बदलते हुए माहौल में इस सौदे को रद्द कर दिया है। इसके चलते सोमवार को रिलायंस के शेयर में गिरावट जारी रही।
पेटीएम के शेयरों में गिरावट भी वजह
इसके साथ ही पेटीएम (वन 97 कम्युनिकेशंस) का स्टॉक मूल्य हाल के इतिहास में सबसे खराब लिस्टिंग-डे प्रदर्शन के बाद दो दिन में 44 फीसदी तक टूट गया। इसका प्रभाव भी आज बाजार पर दिखा।
यूरोप में कोरोना के मामलों में इजाफा
बाजार में गिरावट का एक प्रमुख कारण यूरोप में कोरोना संक्रमण के मामलों का फिर से बढ़ना भी है। कोरोना के मामले बढ़ने से निवेशकों की धारणाओं को प्रभावित किया। इसके चलते बाजार में कमजोर संकेत दिखे और गिरावट बढ़ती गई।