दिल्ली के बाद मुंबई में भी सीएनजी की कीमत 1.50 रुपये प्रति किलोग्राम और पाइप से घरों में पहुंचने वाली रसोई गैस (पीएनजी) की कीमत में एक रुपये की बढ़ोतरी की गई है। मुंबई और आसपास के शहरों में वाहनों के लिये सीएनजी और घरों में पाइप से प्राकृतिक गैस (पीएनजी) की आपूर्ति करने वाली महानगर गैस लिमिटेड (एमजीएल) ने कहा है कि बढ़ी हुई कीमतें आठ और नौ जुलाई की मध्य रात्रि रात से लागू होंगीं।
कंपनी ने एक बयान में कहा, 'सीएनजी और घरेलू पाइप्ड प्राकृतिक गैस (पीएनजी) सेगमेंट की बढ़ती मात्रा को पूरा करने के लिए और घरेलू गैस आवंटन में कमी के कारण, एमजीएल अतिरिक्त बाजार मूल्य पर प्राकृतिक गैस (आयातित एलएनजी) की सोर्सिंग कर रही है, जिसके कारण गैस की लागत अधिक है।'
कंपनी के अनुसार गैस लागत में हुई वृद्धि की आंशिक भरपाई के लिए सीएनजी की डिलीवरी कीमत में 1.50 रुपये प्रति किलोग्राम और घरेलू पीएनजी की कीमत में 1 रुपये प्रति मानक क्यूबिक मीटर (एससीएम) की बढ़ोतरी की गई है। इससे, मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में सभी करों सहित सीएनजी की संशोधित डिलिवरी मूल्य 75 रुपये प्रति किलोग्राम और घरेलू पीएनजी की कीमत 48 रुपये प्रति एससीएम होगी।
राष्ट्रीय राजधानी और आसपास के शहरों के लिए सिटी गैस लाइसेंस धारक इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड ने 22 जून को दिल्ली में सीएनजी की कीमत एक रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ाकर 75.09 रुपये कर दी थी। हालांकि, दिल्ली में पीएनजी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है यह 48.59 रुपये प्रति एससीएम बनी हुई है।
कंपनी ने कहा, "उपरोक्त संशोधन के बाद भी, एमजीएल की सीएनजी मुंबई में मौजूदा मूल्य स्तरों पर पेट्रोल और डीजल की तुलना में क्रमशः लगभग 50 प्रतिशत और 17 प्रतिशत की आकर्षक बचत प्रदान करती है, जबकि एमजीएल की घरेलू पीएनजी उपभोक्ताओं को बेजोड़ सुविधा, सुरक्षा, विश्वसनीयता और पर्यावरण के लिहाज से श्रेष्ठता प्रदान करती है। मामूली वृद्धि के बाद भी, एमजीएल की सीएनजी और घरेलू पीएनजी की कीमत देश में सबसे कम है।
जमीन और समुद्र तल से पंप की गई प्राकृतिक गैस को ऑटोमोबाइल चलाने के लिए सीएनजी में बदल दिया जाता है और खाना पकाने के लिए घरों में पाइप से भेजा जाता है। इस साल सार्वजनिक क्षेत्र की तेल व प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) की घरेलू फील्डों से मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो पाई है। ओएनजीसी क्षेत्रों की सीएनजी मांग में गैस की हिस्सेदारी 66-67 प्रतिशत होती है और शेष का आयात करना पड़ता है।