कंपनियां और खुदरा निवेशक प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) बाजार को लेकर रुचि दिखा रहे हैं। अनिश्चितताओं की वजह कंपनियां अपनी आगे की जरूरतों के लिए पूंजी जुटाना चाहती हैं। अगस्त में भारतीय आईपीओ बाजार का रिकॉर्ड टूट सकता है।
| साल | कंपनियां | जुटाई गई रकम (रुपये में) |
| 2007 | 104 | 33946 करोड़ |
| 2008 | 36 | 18340 करोड़ |
| 2009 | 21 | 19307 करोड़ |
| 2010 | 64 | 36562 करोड़ |
| 2015 | 21 | 13513 करोड़ |
| 2016 | 27 | 26501 करोड़ |
| 2017 | 38 | 75279 करोड़ |
| 2018 | 24 | 31731 करोड़ |
| 2019 | 16 | 12687 करोड़ |
| 2020 | 15 | 26628 करोड़ |
| 2021 में अब तक | 38 | 70679 करोड़ |
जानिए क्या है आईपीओ
जब भी कोई कंपनी या सरकार पहली बार आम लोगों के सामने कुछ शेयर बेचने का प्रस्ताव रखती है तो इस प्रक्रिया को प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) कहा जाता है। आईपीओ में पैसा लगाकर निवेशक अच्छे पैसे कमा सकते हैं। पिछले साल कंपनियों ने प्राइमरी मार्केट से 31,000 करोड़ रुपये जुटाए। कुल 16 आईपीओ लॉन्च हुए, जिनमें से 15 की लॉन्चिंग दूसरी छमाही में हुई थी। 2019 के पूरे साल में 16 आईपीओ के जरिए 12,362 करोड़ रुपये जुटाए गए थे।