पहली अप्रैल से शुरू हो रहे नए वित्त वर्ष में न सिर्फ छोटी बचत योजनाओं की जमा दरें घट गई हैं बल्कि मोटर का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस का प्रीमियम और राजमार्गों के टोल टैक्स भी बढ़ गए हैं।
सरकार ने डाकघर की बचत योजनाओं और पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) की जमा दरों में कटौती की है जो पहली अप्रैल से प्रभावी हो गई है। इससे न सिर्फ कर बचाने केउद्देश्य से निवेश करने वालों बल्कि गांव-कस्बे के निवेश करने वाले लोगों को मिलने वाला रिटर्न घट जाएगा।
विशेषज्ञों की मानें तो जमा दरें घटने के बावजूद छोटी बचत योजनाओं में आम लोगों का आकर्षण बरकरार रहेगा क्योंकि निवेश के अन्य सुरक्षित साधन, जैसे बैंक जमा और सरकारी प्रतिभूतियों में पहले से ही कम रिटर्न मिल रहा है।
इसलिए मजबूरी में भी लोगों को निवेश के लिए इन्हीं साधनों का सहारा लेना पड़ेगा। हालांकि, युवाओं और जागरूक निवेशकों के बीच इस साल नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) आकर्षण का विषय रहेगा।