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एसबीआई अर्थशास्त्रियों ने कहा: बैंकों में जमा पैसे पर ब्याज मिलने के बाद भी जमाकर्ताओं को नुकसान

Wed, 22 Sep 2021 03:28 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, मुंबई।

सार

एसबीआई समूह के मुख्य आर्थिक सलाहकार सोम्य कांति घोष की अगुवाई वाली अर्थशास्त्रियों की टीम ने नोट में कहा गया है कि बैंकों में जमा राशि पर ब्याज मिलने से जमाकर्ताओं की पूंजी बढ़ती है। आमतौर पर ऐसा ही होना चाहिए। लेकिन, देश में फिलहाल ऐसा नहीं हो रहा है।
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एसबीआई (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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एसबीआई के अर्थशास्त्रियों का कहना है कि बैंकों में जमा रकम पर खुदरा जमाकर्ताओं को नकारात्मक रिटर्न मिल रहा है। इसका मतलब है कि ब्याज मिलने के बावजूद उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में सरकार को ब्याज से होने वाली आय पर वसूले जा रहे टैक्स पर फिर से विचार करना चाहिए।

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एसबीआई समूह के मुख्य आर्थिक सलाहकार सोम्य कांति घोष की अगुवाई वाली अर्थशास्त्रियों की टीम ने नोट में कहा गया है कि बैंकों में जमा राशि पर ब्याज मिलने से जमाकर्ताओं की पूंजी बढ़ती है। आमतौर पर ऐसा ही होना चाहिए। लेकिन, देश में फिलहाल ऐसा नहीं हो रहा है। इसलिए अगर सभी जमाकर्ताओं को टैक्स में यह छूट नहीं दी जा सकती है तो कम-से-कम सेवानिवृत्त वरिष्ठ नागरिकों को रियायत जरूर मिलनी चाहिए। अधिकांश सेवानिवृत्त वरिष्ठ नागरिक अपने खर्चों के लिए ब्याज पर निर्भर होते हैं। ऐसे में नकारात्मक रिटर्न के बावजूद उनसे टैक्स वसूलना ठीक नहीं है। इस समय पूरी बैंकिंग प्रणाली में कुल 102 लाख करोड़ रुपये जमा हैं।

घट रही हैं ब्याज दरें, जमाकर्ताओं पर असर
वर्तमान नियमों के मुताबिक, बैंक सभी जमाकर्ताओं के खाते में सालाना 40,000 रुपये से अधिक की ब्याज आय होने पर टीडीएस (स्रोत पर टैक्स कटौती) काटते हैं। वरिष्ठ नागरिकों के मामले में यह सीमा 50,000 रुपये से ज्यादा है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि सरकार और आरबीआई का ध्यान इस समय आर्थिक वृद्धि पर है, जबकि बैंकिंग प्रणाली में ब्याज दरें नीचे जा रही हैं। अगर महंगाई दर के लिहाज से देखें तो बैंक जमा पर मिलने वाला ब्याज कई बार नकारात्मक हो जाता है। इसका असर जमकर्ताओं पर पड़ रहा है।  
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बैंकों पर मुनाफे का दबाव
नोट में कहा गया है कि बैंकों में जमा राशि पर मिलने वाले ब्याज की वास्तविक दर बड़ी अवधि के लिए नकारात्मक रही है। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट कर दिया है कि उसका प्राथमिक लक्ष्य विकास दर बढ़ाने में मदद करना है। पर्याप्त तरलता बने रहने की वजह से कम बैंकिंग ब्याज दर के निकट भविष्य में बढ़ने की गुंजाइश नहीं है। इसमें यह भी कहा गया कि प्रणाली में काफी तरलता होने की वजह से इस समय बैंकों पर मुनाफे को लेकर काफी दबाव है।

अर्थशास्त्रियों की सरकार को सलाह

  • कम-से-कम सेवानिवृत्त वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज आय की सीमा बढ़ाई जानी चाहिए। 
  • आरबीआई उम्र के आधार पर ब्याज देने पर रोक लगाने वाले नियम पर फिर से करे विचार।  


बढ़ी है बैंकों में प्रतिस्पर्धा
एक आकलन के मुताबिक, कोर बैंकिंग सिस्टम की लागत छह फीसदी है। इसमें जमा लागत, निगेटिव कैरी ऑन एसएलआर (स्टैट्यूटरी लिक्विडिटी रेश्यो), कैश रिजर्व रेश्यो (सीआरआर) और एसेट्स पर रिटर्न शामिल हैं। रिवर्स रेपो दर 3.55 फीसदी है। ऐसे में अगर कोर फंडिंग कॉस्ट में प्रोविजनिंग लागत भी जोड़ दी जाए तो कुल लागत करीब 12 फीसदी हो जाती है। मौजूदा दौर में बैंक सात फीसदी से भी कम दर पर खुदरा लोन दे रहे हैं। इसमें प्रतिस्पर्धा बढ़ी है।

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