रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर एमके जैन ने मुद्रा कर्जों में एनपीए के स्तर में बढ़ोतरी को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बैंकों से ऐसे कर्जों की निगरानी करने के लिए कहा है। आंकड़े बताते हैं कि 2018-19 में मुद्रा लोन की तुलना में नॉन परफॉर्मिंग असेट या बैड लोन का अनुपात 2.68 फीसदी था। यह 2017-18 में 2.52 फीसदी के मुकाबले 16 बेसिस प्वाइंट बढ़ा है। कुल दिए गए 18.26 करोड़ मुद्रा लोन में से 36.3 लाख अकाउंट्स ने 31 मार्च को डिफॉल्ट कर दिया।
छोटे और मझोले उद्योगों को सस्ते बैंक कर्ज मुहैया कराने के लिए वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुद्रा योजना की पेशकश की थी। सूक्ष्मवित्त को लेकर सिडबी के एक कार्यक्रम में जैन ने कहा, ‘मुद्रा एक ऐसी योजना है, जिससे कई लाभार्थियों को गरीबी से बाहर निकलने में मदद मिली। हालांकि इनमें से कुछ कर्जदारों में गैर निष्पादित आस्तियों (एनपीए) के स्तर में बढ़ोतरी से चिंताएं भी पैदा हुई हैं।’