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आज आरबीआई दे सकता है त्योहारी तोहफा, फिर कम होगी आपकी EMI

Fri, 04 Oct 2019 08:51 AM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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RBI
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अर्थव्यवस्था को गति देने के प्रयासों के क्रम में रिजर्व बैंक (आरबीआई) शुक्रवार को अपनी प्रमुख नीतिगत दर में लगातार पांचवीं बार कमी का एलान कर सकता है। हालांकि आरबीआई के लिए राहत की बात यह है कि महंगाई भी लक्ष्य के भीतर बनी हुई है। केंद्रीय बैंक खुदरा महंगाई को ध्यान में रखते हुए प्रमुख नीतिगत दरों पर फैसला लेता है। इसकी घोषणा शुक्रवार को सुबह 11.45 बजे की जाएगी। 

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विशेषज्ञों के मुताबिक, आरबीआई इस मौद्रिक समीक्षा में रेपो दर 25 आधार अंक घटाकर 5.15 फीसदी कर सकता है, जिससे इस साल रेपो दर में कुल कटौती 135 आधार अंक तक पहुंच जाएगी। हालांकि ज्यादातर विशेषज्ञ दिसंबर में होने वाली समीक्षा में 15 आधार अंक की एक और कटौती की उम्मीद कर रहे हैं।

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास पहले ही संकेत दे चुके हैं कि महंगाई में नरमी के मद्देनजर मौद्रिक नीति को लचीला बनाने की अभी गुंजाइश है। इससे पहले सरकार चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में पांच फीसदी के साथ छह साल के निचले स्तर पर पहुंची आर्थिक विकास दर को रफ्तार देने के लिए कॉरपोरेट कर में भारी कमी, एफपीआई पर लगाए गए उपकर को वापस लेने सहित कई कदम उठा चुकी है।
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आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की यह बैठक इसलिए भी अहम है, क्योंकि उसने रेपो दर में की फायदा ग्राहकों को देने के लिए सभी बैंकों को एक अक्तूबर से अपने कर्ज रेपो दर जैसे बाह्य बेंचमार्क से जोड़ने का आदेश दिया था। बैठक से पहले दास की अगुवाई वाली वित्तीय स्थायित्व एवं विकास परिषद (एफएसडीसी) उप समिति ने मौजूदा व्यापक परिदृश्य का जायजा लिया था।

आरबीआई के पास कटौती की है गुंजाइश

कोटक महिंद्रा बैंक की अध्यक्ष (उपभोक्ता बैंकिंग) शांति एकमबरम ने कहा कि महंगाई के लिए चार फीसदी के मध्यकालिक लक्ष्य के भीतर होने से आरबीआई के पास दरों में कटौती की गुंजाइश है। उन्होंने कहा, ‘हालांकि क्रूड की कीमतों में हाल का उतार-चढ़ाव और सरकार द्वारा दिए गए प्रोत्साहनों का महंगाई व राजकोषीय घाटे पर असर पड़ेगा। हमें इस समीक्षा में रेपो दर में 20 से 25 आधार अंकों की कटौती होने की उम्मीद है।’

बोफा मेरिल लिंच ने कहा, ‘आरबीआई गवर्नर एक बार फिर रेपो दर में उम्मीद से ज्यादा 35 आधार अंक की कटौती कर सकता है। उसकी तरफ से बैंकों को ब्याज दर में कटौती का सख्त संदेश भी दिया जाना चाहिए।’

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