पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक फ्रॉड केस में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को सात हजार पन्नों की चार्जशीट विशेष पीएमएलए कोर्ट में दाखिल कर दी है। ईडी ने इस केस में एचडीआईएल के मालिक राकेश वधावन और उसके बेटे सारंग वधावन को मुख्य तौर पर दोषी माना है।
टीम को घोटाले में आरोपी रियल एस्टेट कंपनी हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और इसकी संबंधित कंपनियों द्वारा जारी किए गए कई चेक मिले हैं। हैरानी की बात ये है कि कंपनी द्वारा जारी किए गए ये चेक बैंक में जमा ही नहीं किए गए। तब भी उन्हें नकद दे दिया गया है।
बैंक की आंतरिक जांच टीम के अनुसार उन्हें जो चेक मिले हैं, वे 10 करोड़ रुपये से ज्यादा के हैं। बाकी के 50-55 लाख रुपये का कोई हिसाब नहीं है। पिछले दो साल में बैंक के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर जॉय थॉमस को एचडीआईएल और ग्रुप की कंपनियों ने चेक भेजे थे, जो जमा नहीं किए गए लेकिन कंपनी को पैसे दे दिए गए थे। संभावना है कि थॉमस ने 50-55 लाख रुपये अपने पास रख लिए हों।
मामले में एक सूत्र ने बताया कि, 'यह आश्चर्य की बात है कि बैंक की तरफ से बांटे गए कुल कर्ज का दो-तिहाई हिस्सा सिर्फ एक ही कंपनी को दिया गया। उसने कहा कि हो सकता है कि बैंक साल 2008 से ही फर्जीवाड़ा कर रहा है। पिछले 10 सालों से हाउसिंग कंपनी एचडीआईएल को पैसे दिलाने के लिए बैंक ने कईं डमी खाते खोले थे।