बैंक लॉकरों से संबंधित नियम बदलने वाले हैं। रिजर्व बैंक ने नए नियम जारी कर दिए हैं। हालांकि इस बदलाव पर अमल में अभी करीब चार माह का समय बाकी है, लेकिन लॉकर धारकों को नए नियमों को जानना जरूरी है।
ग्राहक को बताकर ही शिफ्ट करेंगे लॉकर
बैंक ग्राहक को सूचना देने के बाद ही लॉकर की शिफ्टिंग एक जगह से दूसरी जगह कर सकेंगे। लॉकर के किराये के रूप में टर्म डिपॉजिट का इस्तेमाल किया जा सकता है। बैंक हर बार इस्तेमाल करने की सूचना ग्राहक को ई-मेल और एसएमएस के जरिये देंगे। साथ ही वॉल्ट रूप से एंट्री व एग्जिट का 180 दिन का सीसीटीवी फुटेज भी रखेंगे।
प्रमुख बदलाव एक नजर में
सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में यह कहा था
बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल फरवरी में एक फैसले में शुक्रवार को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) से छह महीने में बैंकों की लॉकर सुविधा प्रबंधन को लेकर विनियमन बनाने को कहा है। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि लॉकर परिचालन के मामले में ग्राहकों के प्रति अपनी जिम्मेदारी से बैंक पल्ला नहीं झाड़ सकते।
जस्टिस एमएम शांतनागौदार और जस्टिस विनीत शरण की पीठ ने कहा था कि वैश्वीकरण के दौर में बैंकिंग संस्थानों की भूमिका बेहद अहम हो गई है। बैंकिंग संस्थान अब आम लोगों के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। पीठ ने कहा कि तकनीकी विकास के कारण अब हम दो चाबी वाले लॉकर से इलेक्ट्रॉनिक लॉकर की ओर बढ़ रहे हैं। नए तरह के लॉकर पर ग्राहकों के पासवर्ड या एटीएम पिन के जरिए आंशिक रूप से पहुंच होती हैं, उन्हें तकनीक के बारे में कम ही जानकारी होती है। इस बात का भी आशंका बनी रहती है कि बदमाश तकनीकी हेरफेर कर लॉकर तक पहुंच जाए और ग्राहकों को इसकी भनक तक न लगे। पीठ ने कहा, ग्राहक पूरी तरह से बैंक के भरोसे रहते हैं। संपत्तियों को सुरक्षित रखने के लिए बैंकों के पास अधिक व बेहतर संसाधन है। ऐसी स्थिति में बैंक अपनी इस जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते कि बैंक के लॉकर के संचालन में उनकी जिम्मेदारी नहीं है।