पीएमसी बैंक के बाद यस बैंक के भी तकरीबन डूब जाने से बैंक में खाता रखने वालों में खलबली मची हुई है। इस हलचल के बीच बुधवार को कर्नाटक बैंक के भी संकट में फंसे होने की चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। हालांकि देर शाम बैंक के मंगलूरू स्थित मुख्यालय से बयान जारी करते हुए ग्राहकों को किसी भी तरह का संकट नहीं होने और उनका पैसा पूरी तरह सुरक्षित होने का भरोसा दिलाने की कोशिश की गई।
कर्नाटक बैंक के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ महाबलेश्वर एमएस ने कहा, बैंक का पूंजी आधार पूरी तरह मजबूत है और उसके पास जरूरत के लिए पर्याप्त पूंजी मौजूद है। सीईओ ने कहा, हम बैंक की आंतरिक नीति के तहत सीआरएआर (संपत्तियों पर भारित जोखिम के लिए पूंजी पर्याप्तता अनुपात) को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की तरफ से तय सीमा से ऊपर बनाए हुए हैं।
उन्होंने कहा, ऑडिट की गई बैलेंस शीट के हिसाब से 31 मार्च 2019 को सीआरएआर 13.17 प्रतिशत था, जो नियाम की तरफ से तय सीमा से बहुत ऊपर है। उन्होंने कहा, 96 साल से अधिक समय से परिचालन में मौजूद बैंक देश भर के 1.1 करोड़ से अधिक संतुष्ट ग्राहकों के भरोसे पर निर्मित है। बैंक पर्याप्त पूंजी, मजबूत बुनियाद वाला और इसका प्रबंधन पेशेवर तरीके से हो रहा है।
महाबलेश्वर ने ग्राहकों से कहा कि वे टेलीविजन या सोशल मीडिया पर बैंक के बारे में आ रही भ्रामक खबरों से भ्रमित न हों। पूरे विश्व में बैंकों की सेहत सीआरएआर से तय होती है, ना कि कथित जमा अनुपात के एम-कैप से।
कोटक, करुर वैश्य और आरबीएल बैंक ने भी दिया बयान
ऐसा नहीं है कि यस बैंक के डूबने से उपजे संदेह का असर केवल कर्नाटक बैंक के ग्राहकों पर ही दिखाई दिया हो। कोटक महिंद्रा ने कहा है कि वह आर्थिक रूप से पूरी तरह मजबूत है और निवेशकों का पैसा भी बिल्कुल सुरक्षित है। इसी तरह आरबीएल बैंक और करुर वैश्य बैंक के प्रबंधनों ने भी बुधवार को बयान जारी करते हुए अपने ग्राहकों को किसी तरह की भ्रामक खबर का विश्वास नहीं करने की अपील की।