किन बैंकों का होगा निजीकरण (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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एक फरवरी 2021 को पेश आम बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की थी कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण किया जाएगा। नीति आयोग ने इसके लिए दो बैंकों ने नाम की सिफारिश की है। इसके तहत सरकार सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन ओवरसीज बैंक में जल्द अपनी हिस्सेदारी बेच सकती है। लेकिन, अब सामने आ रहा है कि सरकार बैंक ऑफ इंडिया में भी अपनी हिस्सेदारी बेच सकती है।
नीति आयोग ने की दो बैंकों की सिफारिश
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, नीति आयोग ने दो बैंकों के नाम की सिफारिश की है। लेकिन सूत्रों के अनुसार, अब बैंक ऑफ इंडिया का नाम भी सामने आ रहा है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार नीति आयोग के प्रस्ताव पर अभी विनिवेश और फाइनेंशियल सर्विसेज विभागों में विचार किया जा रहा है। सचिवों की कोर समिति से मंजूरी मिलने के बाद ये नाम मंजूरी के लिए पहले वैकल्पिक तंत्र के पास रखे जाएंगे। इसके बाद अंतिम मंजूरी के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल के समक्ष रखे जाएंगे।
विनिवेश संबंधी सचिवों की कोर समिति को उन सरकारी बैंकों के नाम सौंप दिए गए हैं, जिनका मौजूदा वित्तीय वर्ष में निजीकरण किया जाना है। समिति के सदस्यों में कैबिनेट सचिव के अतिरिक्त आर्थिक मामलों के सचिव, राजस्व सचिव, व्यय सचिव, कॉर्पोरेट मामलों के सचिव, कानूनी मामलों के सचिव, सार्वजनिक उपक्रम सचिव, निवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव और प्रशासनिक विभाग के सचिव शामिल हैं।
ग्राहकों को नहीं होगा कोई नुकसान
बैंकों के निजीकरण से ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि जिन बैंकों का निजीकरण होने जा रहा है, उनके खाताधारकों को कोई नुकसान नहीं होगा। ग्राहकों को पहले की तरह ही बैंकिंग सेवाएं मिलती रहेंगी। दरअसल इस समय केंद्र सरकार विनिवेश पर ज्यादा ध्यान दे रही है। सरकारी बैंकों में हिस्सेदारी बेचकर सरकार राजस्व को बढ़ाना चाहती है और उस पैसे का इस्तेमाल सरकारी योजनाओं पर करना चाहती है। सरकार ने 2021-22 में विनिवेश से 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है।