फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चीन सहित आसियान देशों ने किया दुनिया का सबसे बड़ा व्यापार करार

Mon, 16 Nov 2020 06:04 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, सिंगापुर।
विज्ञापन
आसियान सदस्य देशों के प्रतिनिधि - फोटो : ANI
विज्ञापन

आठ साल की लंबी बातचीत और विचार विमर्श के बाद चीन समेत आसियान के सदस्य देशों ने रविवार को दुनिया के सबसे बड़े मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए। एशिया में कई देशों को उम्मीद है कि इस समझौते से कोरोना महामारी की मार से तेजी से उबरने में मदद मिलेगी।  

विज्ञापन


क्षेत्रीय समग्र आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) पर दक्षिणपूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) के वार्षिक शिखर सम्मेलन के इतर वर्चुअल तरीके से हस्ताक्षर किए गए। आसियान के 10 देशों के अलावा चीन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जापान और दक्षिण कोरिया शामिल हैं।


आबादी के लिहाज से देखें तो इस समझौते में शामिल देशों की कुल आबादी 2.1 अरब है। दुनिया की कुल जीडीपी का आरसीईपी में शामिल देशों की हिस्सेदारी 30 फीसदी के आसपास है, जो विश्व का सबसे बड़ा व्यापार समझौता है। हालांकि, इसमें चीन का आधिपत्य है। आसियान के दस देशों में इंडोनेशिया, मलयेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, बुर्नेई, वियतनाम, लाओस, म्यांमार और कंबोडिया हैं।  
विज्ञापन


कम शुल्क, निवेश प्रोत्साहन लक्ष्य 
इस साझेदारी का लक्ष्य कम शुल्क, विभिन्न सेवाओं में व्यापार को खोलना और निवेश को प्रोत्साहित करना है ताकि उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं विश्व के अन्य राष्ट्रों के मुकाबले खड़ी हो सकें। इस करार से सदस्य देशों के बीच व्यापार पर शुल्क और नीचे आएगा। वियतनाम के प्रधानमंत्री गुयेन जुआन फुक ने कहा, यह दुनिया का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता है। इससे क्षेत्र में एक नया व्यापार ढांचा बनेगा, व्यापार सुगम हो सकेगा और कोविड-19 से प्रभावित आपूर्ति शृंखला को फिर से खड़ा किया जा सकेगा। 

भारत के लिए छोड़ी पूर्णकालिक की जगह 
समझौते पर हस्ताक्षर के बाद भारत आरसीईपी में कभी भी पर्यवेक्षक सदस्य के तौर पर शामिल हो सकता है। आरसीईपी ने भारत को पर्यवेक्षक सदस्य तौर पर आमंत्रित किया है। भविष्य में पूर्णकालिक सदस्य के तौर पर शामिल होने के लिए जगह भी छोड़ी है।

जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा ने कहा कि उनकी सरकार समझौते में भविष्य में भारत की वापसी की संभावना समेत स्वतंत्र व निष्पक्ष आर्थिक क्षेत्र के विस्तार को समर्थन देती है और उन्हें इसमें अन्य देशों से भी समर्थन मिलने की उम्मीद है। 

आरसीईपी से क्यों अलग हुआ भारत 
भारत आरसीईपी की नींव डालने वाले 16 देशों में शामिल था, लेकिन पिछले साल उसने इससे खुद को अलग कर लिया। इसकी वजह भारत ने बढ़ते व्यापार घाटे को बताया था और कहा था कि आरसीईपी में शामिल होने का मतलब है भारत के बाजारों में चीनी सामानों की भरमार। इससे भारत की आंतरिक अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा। 

 आरसीईपी समझौता क्या है 
आरसीईपी समझौता 10 आसियान देशों (ब्रुनेई, इंडोनेशिया, कंबोडिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, विएतनाम) और इसी क्षेत्र के 6 और बड़े देशों- भारत, ऑस्ट्रेलिया, चीन, जापान, न्यूजीलैंड, दक्षिण कोरिया के बीच एक मुक्त व्यापार समझौता है। इससे समझौते में शामिल 16 देशों के बीच बिना शुल्क या बेहद कम शुल्क पर व्यापार हो पाएगा। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें