तिरंगा झंडा
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इधर, वल्लभभाई पटेल भी इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि लक्षद्वीप को किसी भी हालत में पाकिस्तान के कब्जे में जाने नहीं देंगे। इसलिए उन्होंने त्रावणकोर में राजस्व कलेक्टर को निर्देश दिया कि वो तुरंत पुलिस टीम के साथ जाएं और लक्षद्वीप पर भारतीय तिरंगा लहराएं, ताकि पता चले कि वह इलाका भारत का है। राजस्व कलेक्टर भी इस बात को लेकर काफी गंभीर थे, इसलिए वो तुरंत लक्षद्वीप पहुंचे। वहां उन्होंने आव देखा न ताव तुरंत भारतीय झंडा जमीन में गाड़कर लहरा दिया। कहते हैं कि इसके कुछ ही देर बाद पाकिस्तानी युद्धपोत भी वहां पहुंचा, लेकिन भारतीय झंडा देख कर वो दबे पांव फिर वापस लौट गए। तब से लेकर आज तक यह द्वीप भारत का ही अभिन्न अंग है।