मैसाचुसेट्स के खेत में लुलु नाम का सुअर बेबी नाम की एक अंधी गाय के लिए गाइड बन गया। वह गाय को चारे तक ले जाता और यह सुनिश्चित करता कि वह किसी चीज से टकरा न जाए। इसी राज्य के एक दूसरे फार्म में एक हंस और शेटलैंड घोड़े ने आपस में दोस्ती कर ली। घोड़ा जब बीमार पड़ा तो यह दोस्ती और मजबूत हो गई। घोड़े के इलाज के लिए उसके पास आने वाले किसी भी आदमी पर यह हंस पंख फड़फड़ाकर हमला करता।
ऐसी अनगिनत कहानियां हैं जिनमें ह्वेल और डॉल्फिन कठिनाइयों में पड़े लोगों और दूसरे जानवरों की मदद करती हैं। दरअसल यह किसी को नहीं मालूम कि जानवर दूसरी प्रजाति के जानवरों की मदद करने के लिए आत्म-संरक्षण की प्रवृत्ति को क्यों छोड़ते हैं।
104 साल पहले की वो खौफनाक घटना, जब एक हाथी को सरेआम दे दी गई थी फांसी
कुछ मामलों में निश्चित रूप से यह पहचान गलत होने का मामला हो सकता है। कोई जानवर दूसरे जानवर को गलती से अपना समझ लेता है, लेकिन हंस और घोड़े के मामले में इसका औचित्य साबित करना मुश्किल है। जानवरों पर इंसानी जज्बातों को लागू करना हमेशा खतरनाक होता है, लेकिन इनमें से कुछ मामलों में हमदर्दी के सबूत साफ-साफ दिखते हैं।
दोनों का फायदा
शुतुरमुर्ग और जेब्रा को साथ-साथ रहते देखा गया है। ये दोनों शिकारी जानवरों के लिए भोजन हैं। शुतुरमुर्ग की नजर कमजोर होती है, मगर जेब्रा दूर तक अच्छे से देख लेते हैं। लेकिन जेब्रा की सूंघने की ताकत कमजोर होती है और शुतुरमुर्गों में इसकी क्षमता जबरदस्त होती है। साथ होने पर वे एक-दूसरे को बहुत अधिक सुरक्षा देते हैं।
हनी बैजर (बिज्जू) यूं तो हनी गाइड चिड़ियों का नाश्ता करना पसंद करते हैं, लेकिन उन्हें अच्छा लगता है कि ये परिंदे उनको मधुमक्खी के छत्तों तक ले जाएं। यह बिल्ली और बत्तख के बच्चों की दोस्ती जितना प्यारा भले न हो लेकिन जानवरों की दुनिया में इस तरह की विचित्र चीजें होती हैं। वे जानते हैं कि दुश्मन से भी हाथ मिला लेना और साथ काम करने से दोनों को फायदा हो सकता है।
बिल्लियों और परिंदों को अच्छा दोस्त नहीं माना जाता लेकिन सफोक (इंग्लैंड) के एक खेत में बिल्ली ने एक चूजे को अपना लिया जो लोमड़ी के हमले में घायल हो गया था। बिल्ली ने उसे नहलाया और उसकी देखरेख की जब तक कि उनके बीच पक्की दोस्ती न बन गई।
साइबेरिया के चिड़ियाघर में एक बाघ ने बकरे से दोस्ती कर ली जिसे उसके बाड़े में भोजन के लिए भेजा गया था। इस बाघ ने खाने के लिए डाले गए दूसरे सभी बकरों को खुशी-खुशी खा लिया था, लेकिन इस एक बकरे से उसने दोस्ती कर ली। दोनों साथ-साथ रहने लगे।
वो कुत्ते जो कर चुके हैं अंतरिक्ष की सैर, धरती पर लौटते ही दुनियाभर में हो गए थे मशहूर
बाघ के इस व्यवहार के पीछे एक तर्क यह दिया जाता है कि जब बकरे को बाघ के बाड़े में भेजा गया था तब उसे भूख से ज्यादा अकेलापन सता रहा था इसलिए उसने बकरे को मारकर खाने की जगह उसे दोस्त बना लिया। बकरे की किस्मत अच्छी थी कि वह सही समय पर सही जगह पहुंच गया। इससे ऐसा लगता है कि यदि जानवरों में एक आवेग दूसरे पर हावी हो जाए तो अप्रत्याशित चीजें भी हो जाती हैं।