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पत्नी के श्राप से मर गए परिवार के 14 लोग, अब अपनी मौत के डर से 30 साल से औरत बना घूम रहा ये मर्द

Mon, 04 Nov 2019 07:51 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मौत के खौफ में पिछले 30 सालों से जी रहे चिंता हरण चौहान - फोटो : अमर उजाला
मौत का डर दुनिया का सबसे भयानक डर होता है और इससे बचने के लिए इंसान कुछ भी करने को तैयार रहता है। कुछ ऐसी ही कहानी है उत्तर प्रदेश के जौनपुर में जलालपुर थाना क्षेत्र के हौज खास निवासी चिंता हरण चौहान की। नाम तो इनका चिंता हरण है, लेकिन इन्हें मौत का डर ऐसा सता रहा है कि वो पिछले 30 साल से औरत बने घूम रहे हैं और सोलह श्रृंगार किए हुए। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
चिंता हरण उर्फ करिया के मौत के डर की कहानी भी बड़ी ही खौफनाक है, जिसे सुनकर एक बार तो आप भी सोच में पड़ जाएंगे। दरअसल, 66 वर्षीय चिंता हरण के मुताबिक, प्रेत आत्मा के चक्कर में उनके परिवार के 14 लोगों की मौत हो गई थी। यह पीड़ा उन्हें सताती रहती है। उनकी आपबीती सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो  जाते हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
चिंता हरण जब 14 साल के थे, तभी उनके घर वालों ने उनकी शादी कर दी, लेकिन शादी के कुछ दिन बाद ही उनकी पत्नी की मौत हो गई। इसके बाद कुछ सालों तक वो ऐसे ही रहे और 21 वर्ष की अवस्था में वो भट्ठे पर काम करने के लिए पश्चिम बंगाल के दिनाजपुर चले गए। 

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प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : Amar Ujala
चिंता हरण के हाथ में कई भट्टों के मजदूरों के रसोई के सामान की खरीदारी की जिम्मेदारी थी। वहां पर स्थित एक स्थानीय बंगाली की राशन की दुकान थी। चिंता हरण उसी राशन की दुकान से मजदूरों के लिए सामान खरीदने लगे। धीरे-धीरे दुकानदार से घनिष्ठता बढ़ती चली गई। इसके बाद दुकानदार ने चिंता हरण से अपनी बेटी की शादी का प्रस्ताव रखा और चिंता हरण ने बिना कुछ सोचे समझे बंगाली लड़की से विवाह कर लिया।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Twitter
अब जब चिंता हरण की शादी की जानकारी जब उनके परिवार को हुई तो उन्होंने इसका विरोध किया, जिसके बाद चिंता हरण बिना बताए उस बंगाली लड़की को छोड़ कर गांव लौट गए। उधर बंगाली परिवार को चिंता हरण के असली घर का कोई पता नहीं था, इसलिए बंगाली लड़की ने इसे धोखा समझ कर चिंता हरण के वियोग में आत्महत्या कर ली।  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
लगभग एक साल के बाद चिंता हरण जब फिर कोलकाता वापस गए तो उनको पता चला कि उनकी बंगाली पत्नी ने उनके वियोग में खुदकुशी कर ली। इसके बाद चिंता हरण फिर घर वापस लौट गए। इधर, उनके परिवार वालों ने उनकी तीसरी शादी कर दी, लेकिन शादी के कुछ दिन बाद ही चिंता हरण बीमार पड़ गए। इसके साथ ही उनके घर के सदस्यों के मरने का सिलसिला शुरू हो गया। चिंता हरण ने बताया कि उनके पिता राम जीवन, बड़ा भाई छोटाउ, उसकी पत्नी इंद्रावती और उसके दो बेटे, छोटा भाई बड़ाऊ और तीसरी पत्नी से तीन बेटियां व चार बेटों की मौत का सिलसिला एक के बाद एक चलता रहा। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
चिंता हरण ने बताया कि उनकी मृतक बंगाली पत्नी हमेशा उनके सपने में आती थी और वह चिंता हरण के धोखे पर खूब रोती थी। अब चूंकि परिवार के सदस्यों की मौत से चिंता हरण टूट चुके थे, इसलिए एक दिन सपने में उन्होंने मृतक बंगाली पत्नी से उन्हें और उनके परिवार के अन्य सदस्यों को बख्श देने की गुहार लगाई। सपने में रो-रो कर गुहार लगाने पर मृतक बंगाली पत्नी पिघल गई। उसने कहा कि मुझे सोलह सिंगार के रूप में अपने साथ रखो, तब सबको बख्श दूंगी। 
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मौत के खौफ में पिछले 30 सालों से जी रहे चिंता हरण चौहान - फोटो : अमर उजाला
बस इसी डर से पिछले 30 सालों से चिंता हरण सोलह श्रृंगार करके एक महिला के वेश में जी रहे हैं। उन्होंने बताया कि उस घटना के बाद से वह शारीरिक रूप से स्वस्थ हो गए और उनके घर में मरने का सिलसिला भी बंद हो गया। फिलहाल चिंता हरण के दो बेटे दिनेश और रमेश जिंदा हैं और वो अपने महिला बने पिता के साथ मजदूरी करते हैं। चिंता हरण अभी एक छोटे से कमरे में अपने दोनों बेटों के साथ जीवन यापन कर रहे हैं, लेकिन डर के साये में। 
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