पृथ्वी के वायुमंडल में दिखीं रहस्यमयी संरचनाएं
- फोटो : NASA
Space News: अतंरिक्ष में अक्सर हैरान करने वाली घटनाएं देखने को मिलती हैं। एक बार फिर ऐसी ही घटना सामने आई हैं, जिसे देखकर वैज्ञानिक भी हैरान हैं। दरअसल, नासा के एक उपग्रह ने धरती के आयनमंडल में X- और C- आकार की संरचनाएं देखी हैं, जो अप्रत्याशित है। आयनमंडल पृथ्वी के वायुमंडल का एक विद्युतीकृत क्षेत्र है। यह क्षेत्र सूर्य से विकिरण के वायुमंडल पर पड़ने की वजह से मौजूद है। दिन के समय इसके अणु विद्युत रूप से आवेशित हो जाते हैं जिसकी वजह से इसका घनत्व बढ़ जाता है, क्योंकि सूर्य के प्रकाश की वजह से इलेक्ट्रॉन परमाणुओं और अणुओं से अलग हो जाते हैं, जिससे प्लाज्मा का निर्माण होता है। यह रेडियो संकेतों को लंबी दूरी तक यात्रा करने में सक्षम बनाता है। रात के समय आयनमंडल का घनत्व गिरता है और नासा द्वारा लॉन्च किया गया GOLD सैटेलाइट इस पर नजर रखता था।
नासा ने अपने ग्लोबल-स्केल ऑब्जर्वेशन ऑफ द लिम्ब एंड डिस्क (GOLD) मिशन को 2018 में लॉन्च किया था, जो एक भूस्थिर उपग्रह है। लॉन्च के बाद से ही पृथ्वी के आयनमंडल में घनत्व और तापमान को मापने का काम कर रहा है। पश्चिमी गोलार्ध के ऊपर अपनी भूस्थिर कक्षा से GOLD मिशन हाल के दिनों में भूमध्य रेखा के उत्तर और दक्षिण में स्थित आयनमंडल में कणों के दो घने शिखरों का अध्ययन कर रहा था। रात में घनत्व कम होने पर इन शिखरों के अंदर कम घनत्व वाले बुलबुले नजर आते हैं। यह रेडियों और जीपीएस संकेतों में बाधा पहुंचा सकते हैं। हालांकि, यह सिर्फ धूप का उतार-चढ़ाव नहीं है जिससे आयनमंडल प्रभावित होता है। वायुमंडलीय परत सौर तूफानों और विशाल ज्वालामुखी विस्फोटों के प्रति भी संवेदनशील होती हैं। इसके बाद आयनमंडल में कणों के शिखर एक साथ मिलकर X आकार बना सकते हैं।
संरचनाओं की वजह के बारे में जानकारी नहीं
GOLD ने अपने नए अवलोकनों में आयनमंडल में इनमें से कुछ परिचित X आकार खोजे हैं, लेकिन उन्हें बनाने के लिए किसी भी प्रकार का सौर या ज्वालामुखीय कारक नहीं था। कोलोराडो विश्वविद्यालय के वायुमंडलीय और अंतरिक्ष भौतिकी प्रयोगशाला (LASP) के शोध वैज्ञानिक फजलुल लस्कर ने बताया कि X सरंचना की बीती रिपोर्टें सिर्फ भू-चुंबकीय तौर पर कमजोर स्थितियों के दौरान ही थीं। अप्रैल में जर्नल ऑफ जियोफिजिकल रिसर्च: स्पेस फिजिक्स में एक पेपर प्रकाशित हुआ, जिसके फजलुल लस्कर मुख्य लेखक हैं। इसमें इन अप्रत्याशित टिप्पणियों के बारे में बताया गया है।
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वैज्ञानिक मानते हैं वे हवाओं की दिशा के मुताबिक, आकार और उन्मुख होते हैं। हालांकि, गोल्ड ने X-आकार और रिवर्स-C-आकार के बुलबुले को करीब 643 किमी की दूरी पर चित्रित किया। शोधकर्ताओं का कहना है कि इतनी कम दूरी पर हवा के पैटर्न में इतना भारी बदलाव होना काफी असामान्य बात है। शोध वैज्ञानिक दीपक करण ने बताया कि इस बात का पता लगाना वास्तव में बहुत महत्वपूर्ण है कि ऐसा क्यों हो रहा है। उनका कहना है कि अगर प्लाज्मा में कोई भंवर या बहुत मजबूत कतरनी हुई है, तो यह उस क्षेत्र पर प्लाज्मा को पूरी तरह से विकृत कर देगी। ऐसी गड़बड़ी से सिग्नल पूरी तरह से खो जाएंगे।
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