अठारह साल पहले ब्रिटेन ने पहली बार विश्व युद्ध के जमाने के जासूसों और डबल एजेंट्स से जुड़े क्लासीफाइड डॉक्युमेंट्स सार्वजनिक किए। बीबीसी की क्लेयर हिल्स ने उन दस्तावेजों को देखने के बाद तब ये लिखा था, 'ब्रितानी हितों के लिए काम करने वाले सबसे रंगीन मिजाज जासूस को केवल एक ही कोडनेम से बुलाया जा सकता है। वो है प्लेब्वॉय डबल एजेंट। वो एक ऐसा शख्स था जो बीवी और मेहबूबा दोनों को एक साथ मैनेज कर सकता था।'
लंदन के सेवोय होटल के एक खास कमरे में पोपोव ठहरा करते थे। हसीनाओं का ख्याल किस तरह से रखा जाता है, पोपोव इसमें बाजीगर थे, उन्हें प्लेब्वॉय की शोहरत इसी से मिली। हालांकि बाद में दुनिया को पता चला कि डुस्को पोपोव बिस्तर पर एक से ज्यादा पार्टनर का भी शौक रखते थे।
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ब्रितानी खुफिया सेवा के अधिकारी मेजर टीए रॉबर्टसन ने एक आधिकारिक रिकॉर्ड में पोपोव के बारे में लिखा था, '1940 के क्रिसमस पर मैं और ट्राइसिकल लंदन के क्वैगलिनोस रेस्तरां में लंच पर मिले। वहां से हम लैंड्सडाउन क्लब के बर्कले स्क्वायर पर बिलियर्ड्स खेलने के लिए गए। फिर डिनर के लिए सेवोय होटल लौट आए। मुझे लगता है कि ट्राइसिकल ने खूब इन्जॉय किया। उसने जमकर शैम्पेन पी थी।'
'अत्यंत गोपनीय'
ब्रिटेन की खुफिया मशीनरी में पोपोव की अहमियत का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि कुछ लोग उन्हें देश का सबसे महत्वपूर्ण एजेंट भी कहते थे। वायरलेस कम्युनिकेशन, न दिखने वाली स्याही से लिखे जाने वाले पोस्टकार्ड, माइक्रोडॉट्स के स्पेशल कोड्स, पोपोव की तरकश में ऐसे कई तीर थे।
पोपोव ने अपने जर्मन साथियों को मना लिया था कि वे उन्हें ब्रिटेन की अहम खुफिया सुराग दे रहे हैं, जबकि हकीकत ये थी कि 'एमआई-सिक्स' की रजामंदी से ही पोपोव ये जानकारियां जर्मनी को मुहैया करा रहे थे। एजेंट ट्राइसिकल की फाइल में एक चैप्टर 'अत्यंत गोपनीय' नाम से भी था। इस चैप्टर में उस घटना का जिक्र था, जब एक जर्मन अधिकारी ने पोपोव को ब्रितानी हथियारों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए सवालों की एक लिस्ट दी थी। जर्मन अफसर पोपोव से जानना चाह रहे थे कि ब्रिटेन के वेब्रिज, वोल्वहैंपटन और डार्टफोर्ड में मौजूद कारखानों में किस चीज का उत्पादन हो रहा है। ब्रितानी मिलिट्री के पास किस तरह की बंदूकें और हथियार हैं।
जर्मनी पोपोव से हर बारीक जानकारी जुटाना चाहता था। उनसे पूछा गया था कि ब्रिटेन के पास कितने लड़ाकू विमान हैं, कितने स्पिटफायर और हरीकेन विमान हैं? सेना के बख्तरबंद डिविजन में क्या है और क्या नहीं। ब्रितानी खुफिया सेवा के अधिकारी पोपोव के लिए इन सवालों के जवाब तैयार करते थे जो दिखने में तो वास्तविक लगें लेकिन वे अधूरी हुआ करती थीं। एजेंट ट्राइसिकल इस जानकारी को जर्मन अधिकारियों को मुहैया करा देते थे।
डुस्को पोपोव ने न दिखने वाली एक स्याही का फॉर्मूला तैयार किया था। वो इसे शराब की ग्लास में मिला देते थे। पोपोव की फाइल में ऐसी दर्जनों बातों का जिक्र है। अदृश्य स्याही से लिखे उनके पोस्टकार्ड, एयरमेल से भेजे गए खत जिन पर ओपेन्ड और एग्जामिंड का मुहर लगाया जाता था, प्रेमिकाओं को लिखी चिट्ठियां जो दरअसल हिज मजेस्टी की सर्विस में भेजी जाती थीं।
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वे अंग्रेजी, इतालवी और फ्रेंच तीनों भाषाएं बोलते थे, उन्हें कामचलाऊ जर्मन भी आती थी। अपने मैसेज में उन्होंने मित्र देशों की बमबारी से जर्मनी के शहरों को हुए नुकसान के बारे में जानकारी दी थी। ऐसे ही एक संदेश में पोपोव ने बताया था कि जर्मनी के हैमबर्ग बंदरगाह को बमबारी से बहुत नुकसान हुआ है लेकिन ये अभी भी इस्तेमाल के लायक है।
जहीन और तहजीबदार
डुस्को पोपोव के बारे में ब्रितानी सेना के एक अफसर ने लिखा था, 'एजेंट ट्राइसिकल जर्मनी को नीचा दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं। साल 1941 में एक मौके पर तो पोपोव ने यहां तक कह दिया था कि दो साल के भीतर ब्रिटेन की जीत को लेकर वो पूरी तरह से आश्वस्त हैं, क्योंकि जर्मनी की अर्थव्यवस्था और नैतिक बल दोनों ही कमजोर पड़ गया था।'
ऐसे ही एक रस्मी पैगाम में पोपोव को एक 'जहीन और तहजीबदार शख्स' करार दिया गया था। पूरा संदेश कुछ इन शब्दों में था, 'उसके पास पर्सनैलिटी है, चार्म है। वो यूरोप या अमेरिका के किसी भी शहर में सोसायटी सर्कल में इस तरह से रहता है, मानो वो उसका घर हो। वो इंटरनेश्नल प्लेब्वॉय की तरह है। शांति काल में वो साल का एक महीना या इससे ज्यादा पेरिस में गुजारता है। खूबसूरत औरतों की सोहबत उसे खास तौर पर पसंद है।'
सबसे दिलचस्प बात तो ये थी कि एजेंट ट्राइसिकल ने ब्रितानी खुफिया सेवा से पैसा लेने से मना कर दिया था। पोपोव का कहना था कि जिस देश के लिए वो सच्चे दिल से श्रद्धा रखते हैं, उसके लिए काम करके खुश हैं और जर्मनी उन्हें जरूरत के हिसाब से काफी पैसा देता है। लेकिन कई मौकों पर ब्रितानी खुफिया सेवा ने उन्हें पैसे की मदद दी थी। ऐसे ही एक रिकॉर्ड में लिखा है, 'शुक्रवार, 14 मार्च, 1941। सेवोय में लंच पर मेरी मुलाकात ट्राइसिकल से हुई। जब ट्राइसिकल ने मुझे बताया कि बिल पे करने के लिए उनके पास जरूरी पैसे नहीं हैं तो वो थके हुए दिख रहे थे। इससे ऐसा लगता है कि उनकी पिछली शाम काफी महंगी गुजरी होगी।'
इटली में ट्रेनिंग के बाद अंग्रेजों ने पोपोव को पुर्तगाल भेज दिया, जहां उनके जर्मन बॉस 'कसीनो एस्टोरिल' होटल में रह रहे थे। डेजान टियागो स्टांकोविच बताते हैं, 'उस जमाने में पुर्तगाल का एतिहासिक 'कसीनो एस्टोरिल' होटल जासूसी गतिविधियों का अहम अड्डा हुआ करता था।'
'कसीनो एस्टोरिल' लिस्बन शहर के बाहर एक बीच रिजॉर्ट था। इतिहासकार आयरीन पेमेंटल बताती हैं, 'दूसरे विश्व युद्ध के समय पुर्तगाल एक तटस्थ देश था। यूरोप के अन्य तटस्थ देशों की तरह ही पुर्तगाल में भी जासूसी गतिविधियां अपने चरम पर थीं। होटल की लॉबी, बार, हर जगह जासूस भरे हुए थे। ये ज्यादातर जर्मनी और ब्रिटेन के थे।'
'वे एकदूसरे का अभिवादन करते थे, मिलते-जुलते थे और गोपनीय जानकारी हासिल करने की फिराक में रहते थे। पोपोव और उनके जर्मन बॉस 'कसीनो एस्टोरिल' के रूलेट टेबल (एक तरह का जुए का खेल) पर नंबरों के जरिये जानकारी शेयर करते थे।'
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इयान फ्लेमिंग से मुलाकात
अगर दुनिया इस वक्त कोरोना वायरस के कोहराम से नहीं जूझ रही होती तो बॉक्स ऑफिस पर जेम्स बॉन्ड की 'नो टाइम टू डाइ' का डंका बज रहा होता। डेजान टियागो स्टांकोविच बताते हैं, 'दूसरे विश्व युद्ध के दौरान, 1941 की गर्मियों की एक रात 'कसीनो एस्टोरिल' होटल में डुस्को पोपोव और इयान फ्लेमिंग की मुलाकात हुई।'
तब इयान फ्लेमिंग ब्रितानी नैवल इंटेलीजेंस के अफसर हुआ करते थे और बाद वे जेम्स बॉन्ड का किरदार रचने के लिए दुनिया भर में मशहूर हुए। डेजान टियागो स्टांकोविच कहते हैं, 'मेरा मानना है कि इयान फ्लेमिंग के दिल में जेम्स बॉन्ड का आइडिया उसी मुलाकात के बाद उसी जगह आया होगा।'
पुर्तगाल के बाद डुस्को पोपोव का अलग मिशन अमेरिका था। डेजान टियागो स्टांकोविच कहते हैं, 'अमेरिका जाने से एक रात पहले पोपोव एस्टोरिल में जुआ खेल रहे थे। अगले दिन उन्हें सफर पर निकलना था इसलिए उनके पास ढेर सारा पैसा था। ये पैसा उन्हें जर्मंस ने दिया था। जुए के टेबल पर वे बहुत लापरवाही से बर्ताव कर रहे थे। अलग-अलग लड़कियों के साथ दिखना। उनकी शख्सियत किसी जासूस की तरह तो बिलकुल नहीं लग रही थी। तभी इयान फ्लेमिंग की नजर उनपर गई।'
फ्लेमिंग और पोपोव दोनों एक ही वक्त में एस्टोरिल में थे। होटल पैलेसियो एस्टोरिल की डिस्प्ले में दोनों के चेक-इन डॉक्युमेंट्स लगे हुए हैं। साल 1969 में इसी होटल में जेम्स बॉन्ड की फिल्म 'ऑन हर मजेस्टीज सिक्रेट सर्विस' के कुछ हिस्सों की शूटिंग हुई। होटल में जेम्स बॉन्ड के नाम से एक सुइट भी है जिसमें मेहमान ठहर सकते हैं।
डेजान टियागो स्टांकोविच बताते हैं, 'हमारे पास इस बात की जानकारी है कि फ्लेमिंग और पोपोव यहां नियमित रूप से ठहरते थे। इस बात की पूरी संभावना है कि उस रात कसीनो में फ्लेमिंग और पोपोव की मुलाकात हुई होगी। हालांकि फ्लेमिंग ने पोपोव से मुलाकात के बारे में कभी कुछ नहीं लिखा, इसलिए उनकी कहानी दुनिया को मालूम नहीं है।'
लेकिन फ्लेमिंग की मौत के बाद पोपोव ने अपनी आत्मकथा 'स्पाई एनकाउंट स्पाई' लिखी, जिसमें उन्होंने दावा किया कि उन्हीं से फ्लेमिंग को जेम्स बॉन्ड की प्रेरणा मिली थी। जेम्स बॉन्ड की फिल्म 'कसीनो रॉयल' दरअसल 'कसीनो एस्टोरिल' ही है।
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जेम्स बॉन्ड के लिए प्रेरणा
डेजान टियागो स्टांकोविच कहते हैं, 'इतिहास से ऐसे जासूस बहुत कम हुए हैं जिनकी शख्सियत जेम्स बॉन्ड के किरदार से मेल खाती हो, लेकिन डुस्को पोपोव सचमुच ऐसे थे जो जेम्स बॉन्ड की तरह लगते थे। हां, शराब पीने की आदत छोड़कर। पोपोव का दावा था कि वे जेम्स बॉन्ड की तरह नहीं पी सकते थे, पर 007 का किरदार बेशक शराब का शौकीन है।'
अपनी किताब 'एस्टोरिल' के लिए रिसर्च के सिलसिले में डेजान टियागो स्टांकोविच ने पाया कि फ्लेमिंग ने अपने किरदार जेम्स बॉन्ड के लिए महंगी चीजों, शानोशौकत वाली जीवनशैली और खूबसूरत औरतों का शौक, जैसी खूबियां रची थीं, वो काफी हद तक पोपोव से प्रेरित लगता है। डुस्को पोपोव का डेटिंग रिकॉर्ड ये बताता है कि कई औरतों से उनके संबंध थे। पोपोव की प्रेमिकाओं में फ्रेंच अभिनेत्री सिमोने सिमोन का भी नाम लिया जाता है।
बहुत से लोग ये भी कहते हैं कि पोपोव को एजेंट ट्राइसिकल का कोडनेम इसलिए मिला था क्योंकि वे एक ट्रिपल एजेंट थे और उन्होंने अमेरिका के लिए भी काम किया था। डेजान टियागो स्टांकोविच इसकी एक दूसरी कहानी बताते हैं, जिस कहानी पर मुझे यकीन है, वो ये है कि पोपोव को पर्ल हार्बर बंदरगाहर पर जापानियों के हमले की खबर लग गई थी, लेकिन वे इतने बड़बोले थे और इतनी बेवकूफाना हरकतें करते थे कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई के तत्कालीन डायरेक्टर एडगार हूवर उन पर यकीन नहीं कर पाए। हूवर ने उन पर भरोसा नहीं किया। पोपोव ऐसे शख्स की तरह नहीं लगते थे, जिसके पास इतनी भरोसेमंद जानकारी हो।'
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आखिर जर्मनी के खुफिया अफसरों को पोपोव पर इतना यकीन क्यों था? डेजान टियागो स्टांकोविच कहते हैं, 'जब पोपोव का परिवार बेलग्रेड में गरीबी से जूझ रहा था तो वे दौलत के साथ खेल रहे थे। हजारों हजार उड़ा रहे थे। बेलग्रेड में नाजियों के हमले के दौरान पोपोव का परिवार बंधक बनाकर रखा गया था। इसीलिए जर्मनी को लगता था कि पोपोव पर भरोसा किया जा सकता है। लेकिन पोपोव का डबल गेम इससे कभी रुका नहीं, क्योंकि पोपोव का मकसद किसी और चीज की तुलना में ज्यादा से ज्यादा पैसा हासिल करना था।'